होली हो............. स्नेह अमी मैं पी जाऊँ तो, उर में सुख की डोली हो। उर की कटुता मिट जाये तो, उर की पावन होली हो।। सबमें छुपा हुआ जो सुर है, उसका मैं दर्शन…
शुभ हो होली.......... अरे सुखों की द्वार खड़ी देखो रंगोली, थाल सजाकर देवगणों की आई टोली । होगा हृदय मुदित पाकर सुखों की गागर, देखो अप्रतिम सुख लेकर आई है होली।। सजे नेह के मधु रंगों से उर की…
क्या करें............? पावन गणतंत्र दिवस पर मेरे मन का प्रश्न मुझसे..... गण का तंत्र चलना चाहिये तो था मगर, भीड़ का तंत्र चलने लग गया तो क्या करें? देश के लिये जो कानून जरूरी है बहुत, उसी पर…
किसे कह रहे साल नवल...... भारत माँ कहती है बेटा, किसे कह रहे साल नवल। लहर शीत की थमी नहीं है, गगन नहीं है अभी धवल ।। दिनकर का भी नहीं हुआ है, उत्तर दिग…
शीर्षक- "इस बार मैं कुछ अलग दीपावली मनाऊँगा, . फूटपाथ पर, जितने गरीब लोग रहते हैं, फूटपाथ को ही जो, अपना घर कहते हैं, गरमी, बरसात, सरदी कोई भी मौसम हो, हर मौसम को वो फूटपाथ पर ही सहते हैं,…
अमर तेरा सुहाग हो अखण्ड हो अटल रहे, जीवन पथ पर सचल रहे। अमर तेरा सुहाग हो, चित प्रेम से सजल रहे। दामन में सुधारस रहे, दूर नित गरल रहे। डिगे नहीं थके नहीं, विश्वास शैल सा अचल रहे। अमर तेरा सु…
सुनो मनुज........... जग के जंजालों में बँधकर, तू कहाँ संलिप्त है। पेट,पीठ मिल एक हुए हैं, जठराग्नि उद्दीप्त है।। कब से समेट रहे मनुज तुम, …
तरक्की चाँद तारों को छूकर, तरक्की कर गये हैं बेशक, पर बिन आदमियत, जश्न ये भाता नहीं है। छूती गगन को अट्टालिका है, है अभिराम पूजाघर तुम्हारा। हैसियत बढ़ाता श्वान कीमती तुम्हारा, पर माँ बिन घर ये सुहाता…
अब इतनी सी ख्वाहिश है -१ =============== रहता हूं शहर तेरे मैं अंजाना बनकर। ख्वाहिश बस रहूं एक पैमाना बनकर। शिकायत थी मरहूम जमाने से, शिकायत कागज पन्नों रह गयी। उलट पलट कर देखा तमन्न…
झरना कितना सुंदर ============ ध्वल झरना तू कितना सुंदर। कोश कोश में रूप हैं अंतर।। अमृत रूप दुग्ध नीर तेरा, मन मस्तिष्क में छा जाती। देख नयन भर सौंदर्य तेरा, जीव नया जोश भर जाती। प्रकृति चा…
वन-फूल उपवन ========= वन में खिलकर जब प्रसून, अप्रतिम छवि बन बिखरते। धारण कर मधु मकरंद, नूतनबाला बनकर सजते। नाना रंगों से शोभित प्रकृति, नवल दृष्टि मनमोहक बनत…
कृषक मन व्यथा ========== अन्नपूर्णा अंतस् में बसने वाला, रोता हृदय क्षितिज सुकुमार। कोस रहा अपनी किस्मत को, खेत खलिहान की मेंढ ढोकर।। अप्रत्याशित रूदित अश्रुओं से…
कविता फूटती जब =========== कविता मरहूम बनी मन आवाज होती। रंग रूप भेदभाव अनभिज्ञ भाव होती।। कभी कभी बैराग्य मन आंगन में, भावना कविता बनकर मचलती। लाख रोकती मन मस्तिष्क से, बरसाती धारा बन …
बात मानते............. यदि वेदों की बात मानते, यूँ न धरा को रोना आता। वसुधा कुटुंबकम अपनाते, अरे कहाँ कोरोना आता।। रिपुता की सारी सीमायें, लाँघ गई है जब मान…
सागर के दोहे........... १- तू-तू , मैं-मैं हो रही, भारत माँ है मौन । नेता कुर्सी को लड़ें , देश बचाये कौन ।। २- रक्षक गाली खा रहे, सिर …
सागर के दोहे.......... (१) एक भले कानून पर, करते हैं गुमराह । हित साधन फैला रहे , झूठ-मूठ अफवाह ।। (२) नेता ही करवा र…
सागर की कुण्डलियाँ........... (१) सपन अधूरे ना रहें, कुसुमित हों हर बार। नेह मिले,मिलता रहे, मिले न कोई खार।। मिले न कोई खार, हास नित …
ओ निराकार........... उगाते हो कौन सी भू पर तुम रजतकण, बिखराते हो किस बिधि से इन गिरि शिखरों पर। तुम ओढ़ाते हो नगेश को धवल आवरण , सुस्पन्दन भर देते हो उर की लहरों पर ।। बिलक्षण वृषभ जोतते होंग…
खोज.............. माहुर में भी अमिय खोजना, जो इस उर को आ जाता । तिमिर हारकर , दीपशिखा बन, जीवन पथ पर छा जाता ।। दुश्कर जीवन भी उर में नित, गीत मनोहर धर ज…
मेरी बाल कविता........... मैं बालक............ हिन्दू, मुस्लिम,सिख, ईसाई, सबमें निज को पाता हूँ । मानव का है खून दौड़ता, मानव मैं कहलाता हूँ ।। कहाँ अलग है ज…
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