घास अर घस्येरि एक दा गौं कि बेटि-ब्वारि घास ल्याणा खुणि ईड़ाडाँड जयीं छैं.(ईड़ाडाँड हमर इनै मर्चुला-शंकरपुर सड़को मथि जो डांडु च वैखण ब्वल्दि, यो कार्बेट पार्क कु ही अंतर्गत च|) यख कुँमौ-गढ़वाळ या …
आज बात यमकेश्वर की ... यम्केश्वर में रामलीला इतिहास विदों के अनुसार रामलीला मंचन की शुरुआत सोलवीं सदी में हुई तथा 18वीं सदी के मध्य काल तक रामलीला उत्तराखंड पहुंच चुकी थी कहते हैं कि प…
दि0....22/05/2020 दिन....शुक्रवार गद्य लेखन विधा..... संस्मरण जब महामहिम मुस्कुरा उठे ***************************** बात 5 सितम्बर 2006 की है! जब मैं अपना नेशनल एवार्ड लेने दिल्ली पहुंची थी। पहली बा…
पदमश्री कल्याण सिंह रावत मैती कर्मयोग पृष्ठभूमि मनुष्य का फर्स से अर्स पर पहुंचना अचानक नहीं बल्कि इसके पीछे कर्मो की एक लम्बी पृष्ठभूमि होती है। अचानक तो केवल घटना घटती है कार्य…
उत्तराखंड का बारामासी पर्यटन पर यक्ष प्रश्न देवभूमि उत्तराखंड देश ही ना दुनिया मा अपडि अलग पछांण रखदू। एक तरफ नैसर्गिक सौन्दर्य, गैरी-गैरी घाटी केदारखंड त हैकि तरफा सीधी लंबी श्रृंखला कु…
----- माटी-थाति अर प्रवासी------ गौं मा पळया-खेलया अर बितांया दिनों बटि पढिलिखि भैर गयां मनखि प्रवासी रैबासी बणीतै नौकरी दगडि तखि बसिगिन। यूंकै बीच कै प्रवासी त अपडि गौं माटी की खुशबू बिसरिगिन, …
रंग कूची कु जादूगर,बेमिसाल चित्रकार-नरोत्तम आर्ट- रंगिळा बसंत कु रैबार, बेहतर कलाकार 'नरोत्तम पंवार' लस्या पट्टी जखोली ब्लाॅक त्यूखर गौं का एक साधारण परिवार बटि निकल्यां नरोत्तम पंवार जी आम …
-'फूलदेई त्योहार'- एक दंतकथा हमारे बचपन मे अक्सर सुनने को मिलती थी, कि फ्योंली नाम की एक सुंदर लड़की जंगल मे पली बढ़ी। बंदर, हाथी, मधुमक्खी पेड़ पौधे सरीके जीव उसके दोस्त थे वो उनसे खूब सार…
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