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Berberis किंगोड़ किलमोड़ा

किंगोड़/किलमोड़ा Berberis या Barberry

नमस्कार दोस्तो उत्तराखण्ड जड़ी बूटियों के लिए जाना जाने वाला प्रदेश है। यहां हर वनस्पति अपने मे एक स्थान रखती है, यहां तो पानी भी अपना असर दिखाता है। बस फर्क इतना है कि हम इनका उपयोग और महत्व को नही जान पाए है आज हम जानेंगे ऐसी ही एक ऐसी वनस्पति के बारे में जो आज विलुप्ति के कगार पर है।
दोस्तो जैसा कि मैंने अपने पिछले अंक में बात की थी हिंसोले के बारे में जानकारी दी आज एक और नए जंगली पौधे औषधीय गुणों से भरपूर है। जैसा कि मैंने अपने पिछले लेख में कहा था कि मैं अपने अगले लेख में किंगोड़े कई जानकारी लेकर आऊंगा, तो दोस्तो चलिये आज बात करते है किलमोड़ा की इसके औषधीय गुणों की यह पौधा कहा पाया जाता है, और इसे किस किस उपचार में प्रयोग किया जाता है। किंगोड़ा का नाम सुनते ही मुँह में पानी आ जाता है इसका बचपन मे खूब स्वाद लिया है मैंने आप लोगो ने भी खूब लिया होगा यदि आप गांव में रहे होंगे तो। क्योकि शहरो में तो यह दुर्लभ है और अब पहाड़ी क्षेत्रों से भी लुप्त होता जा रहा है।
दोस्तो इससे पहले कि मैं लिखना शुरू करू एक सवाल पूछना चाहता हू कि क्या इन जंगली पौधों की खेती की जा सकती है?
दोस्तो एक बात आपके संग सांझा करना चाहूंगा कि जब मैं लगभग 7 या 8 वर्ष का रहा हूंगा तो लगभग 1992 के आसपास उस समय मुझे याद है गांव में लोग खूब किंगोड़े की जड़े खोदकर बेचते थे लेकिन गांव वालों को तब भी इसके बारे में
नही थी कि इसका क्या उपयोग है और आज भी जानकारी नही है। मेरा इन वनस्पतियों पर लेख लिखने का आशय यह है कि लोगो को जानकारी हो और आप ठीक समझे तो इसे अपने स्वरोजगार से जोड़े और जो फायदा इसके जानकार उठा रहे है वो आप भी उठाए, जैसा कि बागेश्वर के भागीचन्द्र टाकुली जी उठा रहे है, आगे इनके बारे में भी लिख रहा हूं कृपया लेख को पूरा जरूर पढ़ें।
किंगोड़ एक ऐसा नाम जिसे पहाड़ो में उपेक्षित किया जाता है, बल्कि उत्तराखण्ड में तो गाली भी दी जाती है "त्यारा पुंगड्यू किंगोड़ू का कांडा जमला" कुछ जगह तो जख़्या को भी गाली माना जाता है लेकिन कुछ जगह लोग समझदार हुए तो उन्होंने जख़्या की खेती भी करनी शुरू कर दी है।
खैर हम अभी बात कर रहे है किंगोड़ कि तो इसी पर बात करेंगे जख़्या कि बात मैं अपनी आगे आने वाले लेखों में करूँगा।
किंगोड़/किलमोड़ा इसे दारू हल्दी या दारुहरिद्रा के नाम से भी जाना जाता है, आपको बता दू कि दारू का अर्थ शराब से नही बल्कि लकड़ी से है दारू संस्कृत में लकड़ी को कहा जाता है और हरिद्रा हल्दी को। इसका अंग्रेजी नाम Berberis Aristata है। किलमोड़ा एक कटीली झाड़ीदार जंगली पौधा है हिंसोले कि तरह ही इसकी खेती नही की, यह पहाड़ो में समुद्र तल लगभग 1200 1800 मीटर की ऊँचाई पर स्वयं ही पैदा हो जाता है। इसकी लंबाई लगभग 1 से 5 मीटर तक होती है। ऐसा भी मुझे जानकारी मिली कि उत्तराखण्ड के प्रसिद्ध शहर अल्मोड़ा का नाम भी किलमोड़ा से ही पड़ा है यह बात कितनी सत्य है इस विषय में मुझे अधिक जानकारी नही है, यदि किसी को जानकारी हो तो जानकारी अवश्य सांझा करे।
दोस्तो किंगोड़ का काफी मात्रा में व्यावसायिक उपयोग किया जाता यह एक ऐसी वनस्पति है जिसका हर भाग औषधीय गुणों से भरपूर है। स्थानीय लोगो को इसकी जानकारी न होने के कारण बाहरी ठेकेदारों ने इससे काफी लोगो ने खूब मुनाफा कमाया 2007-08 में दिल्ली निवासी एक ठेकेदार ने किंगोड़े की जड़ो को खोदकर काफी अच्छा मुनाफा कमाया। चाहे इसकी छाल हो, फूल हो पत्ती हो या जड़े हो। मधुमेह के लिये इससे बेहतर दवा नही है, मधुमेह की दवाइयों में भी इसका प्रयोग किया जाता है। इसमें एन्टी डायबेटिक गुण होते है जिसकी वजह से यह अन्य पौधों से कुछ अलग भी है। किंगोड़ा में बरबरीन रसायन होता है जिसके कारण यह पीले रंग का होता है। इसकी जड़ो को पानी मे भिगोकर रखकर और उसके बाद छानकर पीने से मधुमेह(शुगर) और पीलिया के रोग से निजात मिलता है। मूत्र संबंधी रोगों में भी किंगोड़ का उपयोग किया जाता है। इसके फलों का उपयोग भी रोगों के उपचार में किया जाता है। आई फ्लू(आँख आना) में भी किंगोड़ का प्रयोग किया जाता है। इसके फलों में विटामिन सी मौजूद होता है जो कि त्वचा रोगों में काफी लाभदायक होता है। इसमें एन्टी डायबेटिक के अलावा इसमें एन्टी इंफ्लेमेटरी, एन्टी ट्यूमर, एन्टी वायरल, व एन्टी बैक्टीरियल तत्व विद्यामान है। किलमोड़ा का प्रयोग लिवर सिरोसिस व बुखार में भी किया जाता है। बवासीर रक्त स्राव में भी किंगोड़ा का प्रयोग किया जाता है। सबसे अधिक उपयोग इसका मधुमेह के इलाज में किया जाता है। इसके तने को यदि कूटकर मक्खन के साथ मिलकर चेहरे पर लगाये तो यह फेसपैक के रूप में भी प्रयोग किया जा सकता है। किलमोड़ा का प्रयोग मसाले के रूप में भी उपयोग किया जाता है। इसके तने को एक अलग उपयोग भी लिया जाता है जो कुछ अलग है चमड़े की रंगाई में काम आता है।  आपने शायद होम्योपैथी में एक दवा का नाम सुना होगा Barberis Vul CM इसका प्रयोग कई रोगों में होता है जैसे पथरी, पेशाब में खून या दर्द की शिकायत, बुखार में, जोड़ो की सूजन आदि में। हम यह कह सकते है कि यह पौधा बहुत सी बीमारियों का इलाज है। आपको जानकर हैरानी होगी कि किलमोड़ा से तेल का भी निर्माण किया जाता है। बागेश्वर के शामली जिले के खलझूनी गांव के बुजुर्ग ग्रामीण भागीचंद्र टाकुली लगभग डेढ़ दशकों से इससे तेल निर्माण भी कर रहे है। भागीचन्द्र टाकुली जी किलमोड़ा की खेती भी कर रहे है और इससे तेल निर्माण करते है। अच्छी बात यह है कि लखनऊ की एक दवा निर्माता कंपनी को यह तेल काफी पसंद आया है। और यह कम्पनी इस तेल को को टाकुली जी से खरीद रही है। 600 रुपये प्रति लीटर यह तेल बिकता है। सबसे अधिक किलमोड़ा का तेल हिमाचल प्रदेश से भेजा जाता है।  यदि बात करे इसकी प्रजातियों की तो दुनियाभर में इसकी लगभग 450 प्रजातियां उपलब्ध है। भारत के अलावा किलमोड़ा भूटान, नेपाल, दक्षिण पश्चिम चीन, अमेरिका व श्रीलंका आदि देशों में भी होता है।
दोस्तो टाकुली जी ने तो उस गाली को वरदान में बदल लिया है जो अक्सर लोग गाली देते रहते है एक दुसरो को। अगले अंक में हम बात करेंगे उस जंगली वनस्पति के बारे में जो आज के समय मे पहाड़ो से लगभग विलुप्त हो चुका है, जी दोस्तो हम बात करेंगे घिंगरु की।
दोस्तो आपको मेरे द्वारा दी जाने वाली जानकारी कैसी लगी है कृपया प्रतिक्रिया अवश्य करे और अधिक जानकारियों के लिए आप www.khudeddandikanthi.blogspot.in को सब्सक्राइब जरूर करे जल्द ही मैं इन जानकारियों की एक वीडियो श्रृंखला जारी करूँगा ताकि में इन विषयों को जानकारियों को आप तक आसान तरीके से पहुचा सकु।
दोस्तो यदि आपको यह जानकारी अच्छी लगे तो अपने अन्य साथियों के संग जरूर सांझा कीजिये।



अनोप सिंह नेगी(खुदेड़)
9716959339

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