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Fiddlehead Fern लिंगुड़ा, लिगरी, pucuk paku

नमस्कार दोस्तो काफी समय से उत्तराखण्ड की वनस्पति पर कुछ नही लिखा आज लेकर आया हूं एक ऐसे पौष्टिक व औषधीय वनस्पति जो स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभदायक होने के साथ साथ स्वादिष्ट भी होती है।
हम इसके गुणों को जानते तो है किंतु फिर भी इसका व्यवसायिक या वैज्ञानिक उपयोग के नज़रिए से खेती नही करते जबकि एशिया के बहुत से देशों में इसकी खेती भी की जाती है।
दोस्तो इस लेख में बीच बीच मे एक नाम भी आएगा जो कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, उत्तराखण्ड में महानिदेशक के पद पर है और उनका नाम है डॉ. राजेन्द्र डोभाल
तो अब जानते है इस औषधीय वनस्पति के बारे में क्या है और इसमें क्या औषधीय गुण है।
दोस्तो मैं बात कर रहा हूं लिंगुड़ा के बारे में जिसका वैज्ञानिक नाम डिप्लाजियम एस्कुलेंटम(Diplazium Esculentum) एथाईरिसी(Athyriaceae) फैमिली से सम्बन्ध रखता है। मेरा यह लेख डॉ. राजेन्द्र डोभाल जी के आर्टिकल पर आधारित है इसके सभी वैज्ञानिक गुणों की जानकारी उनके ही आर्टिकल से साभार प्राप्त है।
दोस्तो पहाड़ी सब्जियों का अपने मे एक अलग ही स्वाद होता है और इसका स्वाद तब और बढ़ जाता है जब इन्हें लोहे के बर्तन में बनाया जाता है। उत्तराखण्ड में बहुत से ऐसे जंगली पौधे फल आदि है जिनके बारे में हमे ज्ञान ही नही कि ये हमारे लिए कितने लाभदायक है। आप लोगो ने लिंगुड़ा की सब्ज़ी तो बहुत से लोगो ने खायी ही होगी लेकिन क्या आप जानते है इसका प्रयोग अचार, और सलाद में भी किया जाता है। यदि औषधीय दृष्टिकोण से देखा जाए तो इसमें कैल्शियम, पोटेशियम, व आयरन प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।
डॉ. राजेन्द्र डोभाल के अनुसार इसमें सामान्यतः प्रोटीन 54 ग्राम, लिपिड 0.34 ग्राम, कार्बोहाइड्रेट 5.45 ग्राम, फाइबर 4.45 ग्राम प्रति 100 विटामिन सी 23.59mg, carotenoid 4.65 mg., Phenolic 2.39 mg./100gm पाया जाता है।
अब यदि बात करे मिनरल्स की तो ये इस प्रकार है Fe 38.20, mg, Zin 4.30 mg, Cu 1.70 mg, Mn 21.11 mg, Na 29.0 mg, K 74.46 mg, Ca 52.66 mg, Mg 15.30 mg/100 ग्राम पाये जाते है।
ये था इसका वैज्ञानिक ज्ञान अब बात करते है कि ये कब और कहा पाया जाता है। दोस्तो लिंगुड़ा बरसातों के समय पहाड़ी क्षेत्रों में पाया जाता है लेकिन अधिकांशतः यह नदियों के किनारों या पानी के नजदीक अधिक पाया जाता है समुद्रतल से लगभग 2000 मीटर से 3000 मीटर की ऊँचाई के नमी वाले क्षेत्रों में पाया जाता है
इसका वैज्ञानिक नाम तो आपको बता ही चुका हूं अब बात करते है इसके स्थानीय नाम की।
उत्तराखण्ड में इसे लिंगुड़ा, लिंग्वड़ा, लिंगुआ आदि नमो से जाना जाता है अन्य नाम भी हो सकते है। वही सिक्किम में इसे निंगरु(Ningru), हिमाचल में लिगरी, मलेशिया में Pucuk PakuDhekia नाम से भी जाना जाता है।
आपको जानकर हैरानी होगी कि विश्वभर में लिंगुड़ा की 400 प्रजातियां उपलब्ध है।
सब्जी बनाने की विधि जैसा कि मैं जानता हूं हो सकता है आप अलग तरीके से भी बनाते हो।
सभी अन्य सब्जियों की तरह ही पहले इस अच्छे से धो ले, फिर इसे सेम की फली की ही तरह से रेशे निकाल ले और इसके बाद इसे छोटे छोटे साइज में काट ले। इसमें उपयोग होने वाले मसाले इस प्रकार है।
सरसो का तेल
जख़्या
नामक
मिर्च                                       हल्दी
प्याज
लहसुन
दरदरा पिसा गर्म मसाला

सबसे पहले कढ़ाई में सरसों का तेल गरम करे फिर इसमें जख़्या डाले फिर प्याज लहसुन और इन्हें हल्का भूरा होने तक तले टमाटर भी आप इसमें डाल सकते है। फिर लिंगुड़ा और इसमें मिर्च नामक हल्दी और मसाले डाले कुछ देर ढक ले बीच बीच मे सब्जी को हिलाते रहे और 10 मिनट बाद आपकी सब्जी तैयार हो जाएगी इसे गर्मागर्म परोसे।
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अनोप सिंह नेगी(खुदेड़)
9716959339

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