करवाचौथ पर विशेष कविता कविवर श्री नंदन राणा जी द्वारा अवश्य देखे और अपने साथियों और विवाहित जोड़े अपने जीवनसाथियो को अवश्य सुनाये अनोप सिंह नेगी खुदेड़ 9716959339
जिंदगी मुझे कुछ समझाना चाहती थी, जो ना समझ सका अब तक, वह तो स्वप्न में मुझे दिखाना चाहती थी। ना राह मालूम थी, न मंजिल का ही पता था, निकल पड़ा था ना जाने क्यों, मैं उस राह पर, शायद जिंदगी मुझे कुछ समझ…
कौन ध्यान देगा? कही पहाड़ खिसक रहा, कही रोड़ धसक रही, हम तुम कांग्रेस भाजपा की लड़ाई में सफल हो रहे। किन्तु वहां कौन ध्यान देगा? जहा पहाड़ी सिसक रहा! कही बादल फट रहा, कही बाढ़ आ रही, हम तुम फेसबुक पर अन…
नि मिल्दु न चुल्लू मिलुदु यख न चुल्लौ कि आग । अग्यठि दाजि की ना चिलुम सजड़ा साज ।। मूळा कि थिंच्वड़ी न क्वी घ्यू कि गुँदिकी, न छँच्या पळ्यो अब न म्वर्रा कि चटिणी । न डिगिचि कु झुँग…
मेरी यह रचना समर्पित मेरे उन साथियो को जो परदेशो में दूर है अपने परिवार से खासकर उनको जो अपनी माँ से दूर है। आशा है मेरी ये रचना आपको पसंद आएगी। हैरान हूं परेशान हूं, जो सोचता ...
कड़ुआ मगर सच भाग - 4 हम त परदेशी छा हम पलायन की बात नि करूला, चाहे स्यख डुट्याल बसी जा, किलैकि की हम परदेशी जु छा। हम गिच्चू भी नि उफरुला, चाहे सर्या पाहड़ बिकी जा, किलैकि हम त परदेशी ज...
लगभग 13 साल पहले एक भजन लिखने का प्रयास किया था आज अकस्मात ही पुरानी डायरी मिली तो सोचा आप लोगो संग सांझा किया जाए। ओ भोला ओ भोला तेरी जटा मा गंगा जी कु वास चा------2 सर्पो की माला ओ भो...
माया काश! ये माया न होती न धन होता न दौलत होती। जी लेते थे जैसे पहले हम वैसी ही अपनी ज़िन्दगी होती है। अन्न के बदले अन्न दूध के बदले दूध मिलता हर कोई इक दूजे के काम आता। एक गांव हो...
सभी मित्रों को होली की बहुत बहुत शुभकामनाएं होली की हुड़दंड गैल्यो का संग गौ ख़्वालो मा चौक तिबरी मा बिखर्या बनी बनी का रंग चौदिशो रंगों की बहार च दगड्यो की टोली रंगमत च त्यौह...
कड़ुआ किन्तु सत्य भाग - 3 यह कविता चाटुकार पत्रकारों को समर्पित है सच्चे ईमानदार पत्रकार स्वयं को यहां न देखे। पत्रकार कब तक लिखने के दाम लोगे कभी तो मुफ्त में भी लिख दो कब तक र...
कुछ त सोच हुन्दू कुई मेरु भी घर गौ मा जौमा मि जान्दू जौ मा मि भी करदु घर आणु जाणु। अब जाणु कैमा, कैमा लगाण आस अब त लग्युं रैन्दू ख्याला म्यालो कु सास। अपणो मा बि चितांदु अफी थै बि...
मि सतरह साल कु जवान छौ, पर यी ज्वनि मा चिमोड्यो ग्यो बुढ़े ग्यो, कैल इनै झिंझोड़ी कैल उनै झिंझोड़ी, स्वार्थी लोगु ल मिथे खूब करोड़ी। पाणी मेरी पीठि धर्यू पर तिसालु कयु छौ, छैन्द ना...
तुम त नेता जी धन्य छौ! जख चुनौ हुणा वख गुर्रो जन रबदोळ्येणा छौ, जनि चुनौ निपटेणा मिंढको जन हर्ची जाणा छौ, चुनौ से पैली त खूब घुंडा मुंडा टेकणा छौ, पर जितणा बाद खुटा भी भया ख्वणी स...
मेरी दूधा की भदेली हे मेरी दूधा की भदेली खांद म बैठी क्या सोचणी व्हैली! कु आलु चट यखम खै जालु परली। हे मेरी दूधा की भदेली भैर क्या जी देखणी व्हैली! घुण्डी घुस्ये कु ऐ होलु भितन...
आखिर ये क्या हो रहा? कही आगज़नी कही, कही जलमग्न सब हो रहा, सुख -सुविधाओं की तलाश में! वजूद स्वयं अपना मानव खो रहा। आखिर कैसा सुख तू खोज रहा? पैदल चलना तुझे दुःख नही दे रहा न बरसात का ...
पश्चिमी सभ्यता मा रबदोल्यणा छौ, सासु ससुर ब्वै-बुबा अर ब्वै बुबा मॉम डैड बण्यां छौ! रिश्तों का मतलब थई बिसरणा छौ। द्यूर ज्येठा जी भी भैजी भुला बणी गी, मिन्तर जेठू थै भी भाई सा...
कुछ आंसू कुछ अनुभव लिख रहा हूं, घूसखोर दलालो की कथा लिख रहा हूं, लुटेरों की मौज, अपनी व्यथा लिख रहा हूं, बर्बाद-ए- ज़िन्दगी अपनी लिख रहा हूं। मतलबी दुनिया के हाल चाल लिख रहा हूं, द...
।।मेरु कु सुपन्यों उत्तराखण्ड।। हिमामै की कोळी म पसिरियों मेरु सुपिन्यों कु उत्तराखण्ड हिमालै की लोळी म चमकुणु मेरु सुपिन्यों कु उत्तराखण्ड। बुग्याळों म गिरमुण्डी खेळूणु मेरु …
होटले नौकरी भांडों का ढाँगो मा ढक्याँ छां माँ जी तन्दूरै की हाळी मा पक्यां छां माँ जी छ्न्दा रौंत्याळा मुल्क छोड़ी रात-दिन हम होटलों की खस्यों मा लुक्यां छा…
हरेला लोक पर्व की बधाई बिन पौधों से बरसता नही ये मौसम न सावन में न भादो में,, आवो श्रृंगार करें हम धर्ती माँ का कहीं पेड़ न रह जाये सिर्फ हमारी यादों में,, चलों खुद की आँसुओं से ही ...
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