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Showing posts from 2016

चीनी मिथ ज़हर

*आरोग्यं -- चीनी एक जहर है जो अनेक रोगोँ का कारण है ।
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चीनी बनाने की प्रक्रिया मेँ गंधक का सबसे अधिक प्रयोग होता है । गंधक माने पटाखोँ का मसाला ।
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गंधक अत्यंत कठोर धातु है जो शरीर मेँ चला तो जाता है परंतु बाहर नहीँ निकलता
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चीनी कॉलेस्ट्रॉल बढ़ाती है जिसके कारण हृदयघात या हार्ट अटैक आता है
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चीनी शरीर के वजन को अनियन्त्रित कर देती है जिसके कारण मोटापा होता है
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चीनी रक्तचाप या ब्लड प्रैशर को बढ़ाती है ।
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चीनी ब्रेन अटैक का एक प्रमुख कारण है
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चीनी की मिठास को आधुनिक चिकित्सा मेँ सूक्रोज़ कहते हैँ जो इंसान और जानवर दोनो पचा नहीँ पाते
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चीनी बनाने की प्रक्रिया मेँ तेइस हानिकारक रसायनोँ का प्रयोग किया जाता है
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चीनी डाइबिटीज़ का एक प्रमुख कारण है
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चीनी पेट की जलन का एक प्रमुख कारण है
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चीनी शरीर मे ट्राइ ग्लिसराइड को बढ़ाती है
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चीनी पेरेलिसिस अटैक या लकवा होने का एक प्रमुख कारण है
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चीनी बनाने की सबसे पहली मिल अंग्रेजोँ ने 1868 मेँ लगाई थी । उसके पहले भारतवासी शुद्ध देशी गुड़ खाते थे और कभी इस तरह से बीमार नहीँ पड़ते थे ।
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चीनी से मिश्री पे आएँ और मिश्री से गुड़ पे आएँ. दिखावे पर …

दैणी ह्वैगी सि गिच्ची

आज दैणी व्हैगी सि गिच्ची, जौ गिच्योल गाली दी छकैकि, जिकुड़ियुं सेली पोड़ि व्हैलि तौकि, जौकि गाल्युल बांजी कयेलि पुंगड़ी गौ की।

आज दैणी व्हैगी सि गिच्ची, जौल निपल्टु कायी स्वारा भयो की,  आज तरसदि त व्हैलि जिकुड़ि तौकि, जौल निपल्टु कायी कतगो की।

आज दैणी व्हैगी सि गिच्ची, यकुला पोड्या लोगु कुड़ी खौंदार कैकि, हेरणि त व्हैलि बाटू टपरांदी आँखि तौकि, कैमा लगौ आस सास अपणा सुख दुःखो की।

आज दैणी व्हैगी सि गिच्ची, निर्जड़ी लगै जौल अपणा परयो की, फिटकार मारी घात घाली की, निर्जड़ी लगैयाली सर्या गौ गुठ्यारो की।

आज दैणी व्हैगी सि गिच्ची, लोगु गौड़ी भैस्युं भ्यालुन्द फरकै की, आज बैठ्या छी जोगी बणी की, हौर्यु की छान्यो कण्डे कण्डे की।

आज दैणी व्हैगी सि गिच्ची, तौ देवतो घत्ये-घत्ये की, येकु बुरु हैक बुरु बुरु कै कैकि, अलोप कैयलि देवता फिटकारी की।

अब किलै छै रुणि टोप दे देकि, वैदिन धौ नि खै जरसी गाली दे दे की, अब त खुश व्हैगे व्हैलि, अपणी गाल्यु थै पनपै की।


अनोप सिंह नेगी(खुदेड़) 9716959339

प्रवासी

प्रवासी बोलुण कतगा आसान च,
कभी प्रवासी जीवन जी की त देख,
दस बाई दस का कमरा म रै सै की त देख,
प्रवासी जन घर बौण करी की त देख,
बिसरी जैली प्रवासी बोलुणा कु ढब,
जरा पीड़ा वैकि समझी की त देख।

उत्तराखण्ड स्थापना दिवस

उत्तराखण्ड स्थापित त व्हैगे,
जड़ नि मिली अब तक।
सोलह साल म आठ मुख्यमन्त्री व्हैगी,
राजधानी सुनिश्चित व्है नि अब तक,पुंगड़ी बंजे गी पहाड़ो मा,
पर चकबन्दी व्है नि अब तक।
पलायन बढ़दी जाणू पहाड़ मा,
रोज़गार व्यवस्था दिखे नि अब तक।कनकै दे द्यु सोलहवी वर्षगांठ की बधै,
उत्तराखण्ड उत्तराखण्डियुँ कु व्है नि अब तक।
जौका प्रताप उत्तराखण्ड मिली हम थै,
ऊथै न्याय मिली नि अब तक।एकजुट एकमुट व्हैजा मेरा दगड्यों,
बीस नवम्बर हक़ लेण आवा रामलीला मैदान तक।
धै लगाणु अपणु समाज हम तुम थै,
एकजुट एकमुट व्है जौला जन्म-जन्मों तक।

अनोप सिंह नेगी(खुदेड़)
9716959339

ऐ कायर पाकिस्तान

जी तो करता है ऐ कायर पाकिस्तान,
आज तेरा इतिहास लिख दू।
रज में मिला दू तुझे कही ऐसा न हो,
खगोल भूगोल तेरा मैं बदल दू।बस अपनी खुशकिस्मती समझ तू,
कि मैं भारत जैसे शांतिप्रिय देश से हूँ।
नही तो सच कहता हूँ मेरा बस चले,
तो मैं तेरा इस धरती से नामो निशां मिटा दू।तेरी इस कायराना हरक़त का तुझसे,
गिन गिन मैं बदला लू।
मेरे जवान तो शहीद हुए है,
तुझे मैं नर्क में भी जगह न मिलने दू।हर बार न पृथ्वीराज तुझको मिलेगा,
जो तुझे हर बार माफ़ करेगा।
सच कहता हूँ मुझे मौका मिला तो,
तुझे कीड़े मकोड़ो के जैसे मसल दू।मेरे सब्र की हद तो अब पार हो गयी,
न मुझे और उकसा कही तेरा सर न कुचल दू।
अपने इतिहास में झाक ले एक बार,
कही तेरा इस बार उससे से भी बुरा हस्र न कर दू।जय हिन्द जय भारत अनोप सिंह नेगी(खुदेड़)

म्यार अपुंण बचपन

दीदों ये माटु मा खत्युं
म्यार अपुंण बचपन
पाटी बुखल्या लेकी
जब जांद छ्या हथपन
मतीसारी बिटी सरा
गांव दिख्यांणा म्यारु
आंखी भरे गेन देखी
ब्वांग अपुंण प्यारु
जब भी जांदु गांव दीदों
खुजदु अपुंण बचपन
कबी कंली मुड कबी
दीदों कंली मथपन
हपार दिख्यांणा छन
सरा बाट म्यार गांव क
पीपला खोली बाटु दिख्यांणा
  डिग्गी जुगंल्या पाणी क
  ख्यात बी दिख्यांणु च
  आली बी दिख्यांणु च
  ढुकांणी अर छ्वाया बीटी
   गांव सरा दिख्यांणु च
बगत क हिसाब किताब भी
अजब गजब छ्यायी
बिंडु क घाम देखी की
सुबेर चितांद छ्यायी
बुये बुल्दी छै धै लगे की
गौर बंधण क टैम ह्वै ग्यायी
खाल अछल्या ककडी अछल्या
घाम रीयाड म पौंछी ग्यायी
दीदों ये माटु मा खत्युं
म्यारु अपणु बचपन
पाटी बुखल्या लेकी जब
गे छ्या मी.......
सर्वाधिकार सुरक्षित @सुदेश भट्ट(दगडया)

सरदार वल्लभ भाई पटेल

आज त्वै सरा देश
याद करना बौडा
त्वै बिना देश सरा
खुदयांणा च बौडा
   गली मोहलों मा आज तेरी
   जयजयकार बौडा
    अंग्रेजु तै देश बिटी
    तीनी निकाली बौडा
देशभक्ति कु पाठ देश तै
त्वैन सिखाई बौडा
रातों रात अंग्रेजु तै
त्वैन दौडाई बौडा
      आज ह्वैंदी हमर बीच
       बीर भग्यान बौडा
        जुनी पर पौंछी जांद
         देश अपुण बौडा
कन कन पैदा ह्वेन
म्यार देश मा बौडा
त्वै जन लौह पुरुष
कुई नी जन्मी यख बौडा
    आज ह्वैंदा हमर बीच
     तुम जन बीर बौडा
       क्या मजाल दुश्मनु की जु
        आंख घुरांदन बौडा
तेरी एक कडकताल से
अंग्रेज भी डरी गैन बौडा
झ्वाला तुमडी लेकी अपणी
रतों रात चलीगेन बौडा
    लिखंण कुन त दगडया मा
     बहुत कुछ त्वै पर च बौडा
      जतका लेखु उतका कम
       आखर नीछन मीमा बौडासर्वाधिकार सुरक्षित@सुदेश भटट(दगडया) की लौह पुरुष सरदार बल्लभ भाई पटेल जी के जन्मोत्सव पर सप्रेम भेंट

वा त्यार बान (करवाचौथ)

वा त्यार बान दिनभर
भुख तीस बैठीं च
सांकी सुकी ग्या बिचरी क
गली तीसन उबयीं च
     हथ्यूं मां मेहंदी रचैकी
     श्रृंगार खुब कर्युं च
     त्यार बान दादा बौ
    बिगरेली ब्योंली बंणी च
जरा भी फिकर ह्वैली
बगत पर घर यैली
आज किसा मा पव्वा ना दा
कुई नई निशाणी लैली
     वा त्यार बान हे नरबै
    भुख तीसी बैठीं च
    त्वै कन नी फिकर भैजी
   तेरी अपणी महफिल सजयीं च
ठ्यकों मा बैठीक त्यारु
स्वीच भीआफ कर्यूं च
नशा मा चुर भुनी
यांमा कुछ नी धर्युं च
    वा बिचरी त्यार बान
    भैर भितर कनी च
     त्वै कन नी फिकर वा
     जुगली जुनी क कनी च
वा तुमरी बान दिनभर
भुख तीस बैठीं च
      परबात च दीदों
    करवाचौथ कु त्योहार
    लखांणु च सुदेश भट्ट
   तुमकुन पैली यु रैबार
बगत पर घर पौंछी क
अपणी पुजा करै लेन
दोस्तु की महफिल
फिर कभी सजै लेन
वा तुमरी बान दिनभर
भुख तीसी बैठीं        सर्वाधिकार सुरक्षित@सुदेश भटट(दगडया)
सबी दीदी भूल्युं भै बंधुओं तै करवाचौथ की शुभकामनाओ की दगड यु संदेश

दशहरा रावण वध

रावण तु आज बल
जग जगा फूंक्यांणा होली
परबात फिर कखी न कखी
टुपली पैरीक पैदा ह्वे जैली
    कु मारी सकदु दीदा त्वै
    बाहुबली मनखी तै
     परबात भ्रष्टाचार बणी की
     तु  फिर पैदा ह्वै जैली
पैली त्यार खुंटा पन रैन
चांद सुरज अर काल
आज त भ्रष्टाचारयुं की कुटुमदारी
तीन तंदयल पर सी बांधी याल
     तीन त लंका ही बण्या सुन की
     यख त स्वीस बैंक भरै गेन
     तेरी जन दस दस लंका
     भग्यानु जगजगा बणै देन
शरेल ही मरी त्यारु हे रावण
आत्मा त भटकणा ही च
महंगाई अर भ्रष्टाचार बणीक
मार मार कैकी द्वास लगीं च
    कलयुग मा तु हे दशानन
    एक ही मुंड लेकी यैयी
     कखी मंहगाई भ्रष्टाचारी
      कखी घोटाला कैरी ग्यैयी
हाहाहाहा कैकी दादा
तु  आज खुब हैंसणा होली
नयी नयी घोटालों की
भीतरी भीतर प्लान बणांणा होली
       अरे कु मारी सकदु त्वै
       अजर अमर अभिमानी तै
        गबन घोटालों की फाईलों मा
        जगजगा समयुं छै
अरे झुगली टुपली जाली तेरी
हपार कांड की डाल्यूं मा
कैन ब्वाल तु मरी गे
परगट हुयुं छै भ्रष्टाचार्युं मा
      त्वै भ्रष्टाचारी तै मरन कुन
       यख कती राम  पैदा ह्वैन
       जौंन हम मनख्यूं तै…

करवाचौथ

हैंसदी रै ख्यल्दी रै,
टिकुली बिंदुली चमकदी रै,
     मुंड मा सिंदूर तेरो,
      फूलु सी डाली हैंसदी रै।द्वी हथी चुडयुं न भरै,
हतेली मा मेहंदी रचदी रैन,
    नाक मा फुल की चमक,
     खुट्य माुं पैजीब बजदी रैन।हैंसदी रै ख्यल्दी रै,
टिकुली बिंदुली चमकदी रै,
     देवी दयबतों की दीदी भुली
     आशीर्वाद तुमतै मिलणा रैन।घर ह्वा या परदेश स्वामी,
सुखी श्यांदी रखणा रैन,
     तेरी दुनिया की डाली मा दीदी,
     खुशियों क फूल लगदी रैन।तेरी जुनी सी ऊज्याली मुखडी,
मुल मुल हैंसदी रैन,
      हैंसदी रै ख्यल्दी रै,
      तेरी टिकुली बिंदुली....

सर्वाधिकार सुरक्षित@सुदेश भटट(दगडया) व खुदेड़ डाँडी काँठी की करवाचौथ पर दीदी भूल्युं कुन सादर सप्रेम भेंट।

किलै मांग उत्तराखण्ड

टुटदी तिबरी,उजड्यू खण्ड,
क्या इलै ही मांग उत्तराखण्ड?
लोग परदेशों मा बस्या,
रयु क्या वे उत्तराखण्ड?
खाणी-सीणी परदेशों मा,
पिकनिक खुणि उत्तराखण्ड?धुरपालि की पाल टुटी,
देली मा कंडली जमी,
फेसबुक मा स्टेट्स द्यखणु,
की आई लव उत्तराखण्ड।
पलायन पहाड़ कु हुयु,
क्या इलै ही मांग उत्तराखण्ड?नेता मस्तमौला हुया,
डेरा डल्यु दून मा,
शहीद आंदोलनकारी ह्वेगी,
उत्तराखण्ड की लड़ै मा,
स्वच्दा होला वु भी आज,
की किलै मांग यु उत्तराखण्ड?कुछ त सोचो भाइयो तुम भी,
की किलै मांग यु उत्तराखंड,
आओ फिर से बसोंला पहाड़ मा,
सुपन्यो कु बुण्यु उत्तराखण्ड।विकास ध्यानी (चकबन्दी समर्थक)

मेरी ब्वै कु मैत

ये कविता सुदेश भट्ट "दगड्या" जी की अपने ननिहाल  गांव डिवरण (देवराना ) पर  समर्पित है जरूर पढ़े.........रौंत्यालु उल्यारु दीदों,
हपार भग्यान गांव च।
मेरी ब्वै कु मैत प्यारु,
मेरी नन्युं गांव च।हरी भरी सारी यख,
यैथर पैथर गांव क।
झीलकंड बीटी दिखेणा,
सरा डिवरण गांव च।मांजी ह्वे ग्या बुडड़ी मेरी,
मैत मैत बुल्दी च।
मेरी नन्युं गां बिना ब्वै,
आंसु रोज बगांदी च।कचुंड कांडई सरा दिखेणु,
ताल कंडरा बौंसील।
धार मा बस्युं प्यारु,
मेरी नन्युं गांव च।याद यै ग्या बचपन की,
गे छ्या ननी गांव मा।
ममा जी यै छ्या मी लेंण,
अदबाट सिंक्वाणी धार मा।स्वर्ग से भी प्यारु मेकु,
हपार भग्यान गांव च।
मेरी ब्वै कु मैत प्यारु,
मेरी नन्युं.......सर्वाधिकार सुरक्षित@लेखक सुदेश भट्ट(दगड्या)

Unchu Pahar mata bhajan ऊचु पहाड़ बण्युचा मंदिर तेरु माँ

ऊचु पहाड़ बण्युचा मंदिर तेरु माँ
ऊचु पहाड़ बण्युचा मंदिर तेरु माँ
दर्शनों खु तेरा माता भक्त आया छा
दर्शनों खु तेरा माता भक्त आया छा
ऊचु पहाड़ बण्युचा मंदिर तेरु माँ
ऊचु पहाड़ बण्युचा मंदिर bतेरु माँ
दर्शनों खु तेरा माता भक्त आया छा
दर्शनों खु तेरा माता भक्त आया छासाथी : - दर्शनों खु तेरा माता भक्त आया छा
             दर्शनों खु तेरा माता भक्त आया छादिन राति देखणु रैंदु तेरा सुपिन्या
होला तेरा दर्शन कब आलु ऊ दिना
जन्मों बटी माता तेरु नाम सुण्यु चा
दर्शनों खु तेरा माता मी बी अयु छौ
आ बैठी जावा भक्तो माँ का दरबार मा
आ बैठी जावा भक्तो माँ का दरबार मा
दर्शनों खु तेरा माता भक्त आया छा
दर्शनों खु तेरा माता भक्त आया छासाथी : - दर्शनों खु तेरा माता भक्त आया छा
             दर्शनों खु तेरा माता भक्त आया छामन मेरु लगी ग्याई माता तेरी भक्ति मा
मीथै रैण दे माता अपणी शरण मा
मेरा दिल मा माता भक्ति तेरी जगी चा
तेरी भक्ति मा माता जिकुड़ि रमी चा
तेरा शरण अयु दे दे वरदान माँ
तेरा शरण अयु दे दे वरदान माँ
दर्शनों खु तेरा माता भक्त आया छा
दर्शनों खु तेरा माता भक्त आया छासाथी : - दर्शनों खु तेरा माता भक्त …

मेरा गाँव

पंछियों का गुनगुनाना पेड़ों की छाँव है
हिमायल की गोद में बसा ओ मेरा गाँव है, गांव गाँव मंदिर सजे हैं घर घर में राम है
हिमालय मुकुट जिसका गंगायमुना शान है
हिमालय की गोदी में बसा ओ मेरा गाँव है, वीर वीरों की धरा है हर घर में जवान है
सीमा में ताने है शीना उत्तड़खण्ड महान है
हिमालय की गोद में बसा ओ मेरा गाँव है, प्रेम भाव का गाँव मेरा लोग देव समान है
प्यार की दौड़े है गंगा परायों का भी मान है
हिमालय की गोद में बसा ओ मेरा गाँव है, चलो चलें जी गाँव को जो हमारी पहचान है
ख़ुशी लाएं उन घरों में जो हम बिन बीरान है
हिमालय की गोदी में बसा ओ  मेरा गाँव है,
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
पंक्तियाँ~सुरेन्द्र सेमवाल

मेड इन चाइना

कसम छन भयुं तुम कुणै
यैंसु क साल
बार त्योहारु मा नी खरींदण बरै
मैड ईन चैना कु मालहमरी खैकी यु
हमतै यी डमणु च
हमर पैसों न बम ग्वाला
पाकिस्तान भिजंणु चयैंसु की बग्वल्युं मा दीदों
बैर्युं तै जतांण च
उत्तराखंड्युं की ताकत जरा
चैना तै दिखांण चअपंण देश की दीदों
आन मान की बात च
देश की सेवा कु दीदों
यु बी एक बाटु चतडी दिखांदु हमतै नरबै
रोज अखबार टीब्युं मा
भीतरी भीतर हम बी सदला
वै यैंसु बग्वाल्युं मानागरजा नरसिंग दीदों
भैरों क सौं ल्या
लडी लैट सरा धांणी
चैना कु मिटै द्याद्वास लगजा यैंसु सबी
चैना कु सामान फर
उत्तराखंड की ताकत जरा
चैना तै दिखांण चकसम छन भयुं तुमकुन
यैंसु क साल
बार त्योहारु मा नी खरीदंण कथै
मैड ईन चैना कु.....
मैड ईन चाईना का दगड्या द्वारा बहिष्कार पर
@.लेख.. सुदेश भट्ट"दगड्या"

शब्दों की माया

शब्दों की माया
==========         
शब्दों कु भी अपड़ू एक जग जहाँन छः !!
शब्द ही एक ब्यक्तित्व की पहचान छः !!शब्द ही पड़े जांदन मनख्यों की मनोदशा
मनख़्यों की हंशी ख़ुशी और जीवन ब्यथा !!शब्द ही जग़ह देन्दन हम थै कै जिकुड़ा मा
अर अच्छा शब्द ही शोभा देन्दन मुखड़ा माशब्द ही ब्यक्त करदन हमारा बिचारों थै !!
शब्द ही उजागर करदन हमारा बिकारों थैं!!शब्दों से ही हमारी मन भावना छः !!
शब्द ही कैप्रति ब्यक्त कन की सद्भावना छःशब्द ही घौ देन्दन कभी न भरेण वाला !!
शब्द ही जगह देन्दन कभी न उतन वाला !!शब्द ही परछाई छँन हमारा शरीर की !!
शब्द ही हथियार छःन दुखी अर गरीब कीइलै शब्दों थै बोलणू सदनी सोची तोली की
सुदी नि खतणू फ्री समझी रैतु घोली की
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
पंक्तियाँ ~ सुरेन्द्र सेमवाल सर्वाधिकार सुरछित@

अंतर मिटाये

चलो बेटे-बेटी का
अंतर मिटाये,
चलो दोनो को
समान शिक्षा दिलाये।चलो बेटे को
इस लायक बनाये,
दहेज के लिय
वो हाथ न फैलाये।चलो बेटी को
इस काबिल बनाये,
दहेज की बेदी पर
जलायी न जाये।चलो मिलकर हम
आवाज अब उठाये,
रोककर भूण हत्या
बेटी को बचाये।चलो बेटो को भी
संस्कार का पाठ पढाये,
चलो बेटी को भी
बाहर की दुनिया दिखलाये।चलो बच्चो को हम
समानता का अर्थ समझाये,
चलो बेटे-बेटी का
अंतर हम मिटाये।रामेश्वरी सुनीता नादान

आऊंगा ओढ़ तिरंगा

भाई सुदेश भट्ट "दगड्या" जी की वीररस भरी कविता जो सरहद पर तैनात सैनिको को समर्पित है। या आऊंगा ओढ तिरंगा,
या फहरा कर आऊंगा,
दुश्मन का तोड़कर बंकर,
रण जीतकर आऊंगा।अंतिम डग पग और सांस तक,
दुश्मन से टकराऊंगा,
भारत माँ की जयकारा का,
गीत अंत तक गाऊंगा।मिटा दुंगा दुश्मन को अपनी,
गोली की बौछारों से,
पाला पड गया दुश्मन का,
भारत के मतवालों से।एक हाथ मे ध्वज तिरंगा,
दुजे मे मेरी राईफल है,
मिटा दुंगा जड से दुश्मन को,
तिलक माटी का लगाया है।रणभेदी जयकारा से,
धरती कांपेगी दुश्मन की,
माँ के दूध की शपथ है मुझको,
लाज रखुंगा माटी की।या आऊंगा ओढ तिरंगा,
या फहरा कर आऊंगा,
दुश्मन का तोड़कर बंकर,
रण जीतकर आऊंगा।देश की सरहदों पर तैनात सैनिकों को समर्पित कवितासुदेश भट्ट "दगड्या"

माटी के दीप

मित्रो इस बार आप सब से अनुरोध है चाइना की लड़ियों का बहिष्कार करे, उन गरीब मजदूरो के बारे मे सोचे जो रात भर जागकर मिट्टी के दीये बनाते है। इस दीवाली दीपो से रोशन करे घर आँगन को .
इसी विषय पर मेरी(रामेश्वरी 'नादान' की) ये नई रचना।दीपावली की खुशी में
सोया नहीं कई रातो से
वो बना रहा है दीप
नन्हे-नन्हे हाथो सेमुस्कान बिखर जायेगी
नन्हे चेहरे पर किसी के
माटी के दीप खरीद लो
रंग भरे है खुशी केसुगंध माटी की भरी
देश प्रेम भरा अपार
रोशन करो दीपो से
खुशियो भर त्योहार चाइना को दिखानी है
हमें उसकी औकात
रोशन करेंगे दीपो से
दीवाली की रातखुले आकाश में उड़कर
पक्षी देखो चहकते है
अपनी माटी के फूल
अपने देश में महकते है रामेश्वरी(सुनीता नादान)

कन निर्मोही ह्वे तु

भाई सुदेश भट्ट "दगड्या" द्वारा रचित एक कविता जिसमे उन्होंने स्वर्गीय श्री चन्द्रसिंह राही को अपने शब्दों में श्रद्धांजलि दी।कन निर्मोही ह्वे तु
हे बिधाता आज
राही जी तै लीगी तु
रुवाणा छन साज बाज
अब सौली जगजगा
कनमा घुराली
कौथिग क बाना बौ
सतपुली कनमा आली
अब देखेन लुणन दुण
कनमा भर्याल
भागा बे पंचमी भागा
गीत कु सुणालु
ठंडु मठु कैकी अब
चदरी कु हिरालु
पारभीड की बसंती तै
छोरी कु बतालु
भाना तै बांज कटण
दुर कु बुलाल
रुप की खज्यनी तै
भग्यनी कु बतालु
नथुली घंघाल कु
गीत कु लगालु
माया कु जंजाल तै
अब बुरु कु बतालु
देवी दयवतों तै हुडकी मा
अब कु नचालु
नौ खोली क सीयुं नाग
अब कनमा बिजले जालु
तिलै धारु बोला गीत
अब कु लगालु
समदंण्यु तै रीक अब
खुजणा ही रै जालु
त्यार बाना भाना
जोगी भेष कु धरालु
छुमा बौ बसंती छुमा
गीत कु लगालु
ईमारतु क जंगल मा
आदीम कु हर्चालु
प्रदुषण बढी ब्वाली तुमन
बसंत कनमा आलु
कन निर्मोही ह्वे तु
हे बिधाता.......सर्वाधिकार सुरक्षित @ सुदेश भटट (दगडया) सुर सम्राट चंद्र सिंह राही जी तै समर्पित श्रद्धांजली

सुदेश भट्ट दगड्या

नमस्कार दोस्तों आज एक नयी अभिव्यक्ति से आपको परिचय करवा रहा हूँ ये ऐसे व्यक्तित्व के धनि है शायद जो परिचय के मोहताज़ नही इनकी लेखनी ही इनकी सबसे बड़ी पहचान है।
कभी-कभी कुछ अजीब हो जाता है उन अजीब घटनाओ में से एक घटना मेरे संग ये भी घटी गलत नम्बर डायल हो जाने पर कभी कभी लड़ाई भी हो जाती है तो कभी-कभी ऐसी दोस्ती भी हो जाती है जो रिस्तो में भी बदल जाती है कुछ ऐसा ही हुआ मेरे साथ मार्च 2016 की बात है मैं अपने गरीब क्रान्ति अभियान से जुड़े साथियो के साथ उत्तराखण्ड की राजधानी(जो आज तक बन न सकी) गैरसैण गया था। वहा मेरी मुलाकात भाई मनीष सुन्द्रियाल जी से हुई। यु तो उस दिन उत्तराखण्ड की बहुत सी महान विभूतियो से प्रथम बार मिला जिनके बारे में भविष्य में अवश्य लिखूंगा अभी मैं इस लेख के लिखने के उद्देश्य पर आता हूँ। वैसे तो सोशल मीडिया के माध्यम से मैं मनीष सुन्द्रियाल जी से पहले ही परिचित था किन्तु ये मेरी उनसे पहली मुलाक़ात थी। मनीष जी एक ऐसे युवा है जो पहाड़ में स्वरोजगार की मशाल हाथ में लिए घूम रहे है मैंने भी उनसे कुछ बुरांस और माल्टा का जूस ले लिया दिल्ली के लिए। और पहुच गया दिल्ली में। फिर लगा ब…

विजया पंत तुली

दोस्तों आज बहुत दिनों बाद किसी के बारे में लिखने का मन हुआ आज मैं ऐसी शख्सियत के बारे में लिख रहा हूँ जिनका आज जन्मदिन है।
लगभग तीन वर्ष पूर्व मैं मैं इन महान व्यक्तित्व से जुड़ा जिनका नाम है पर्वतारोही विजया पंत तुली फिर समय बीतता गया और मैं इनके बारे में जानने लगा। इतना पता था कि आप एक पर्वतारोही है लेकिन इतनी खास भी है ये पता न था। जब आपके बारे में पढ़ना शुरू किया सोशल साईट से जानकारी मिलने लगी तब मालुम हुआ की विजया जी एक ऐसी पर्वतारोही है जिन्होंने यहाँ तक पहुचने के सोची भी नहीं थी लेकिन आज एक सफल पर्वतारोही है। अपने कॉलेज जीवन में आप स्पोर्ट्स चैंपियन भी रही हैं। यही से आपके जीवन में एक अहम मोड़ आया यही से आपको आपके पारिवारिक मित्र सुंदरलाल बहुगुणा जी ने आपको पर्वतारोहण में जाने का निमन्त्रण दिया और अपने उनके इस निमन्त्रण को स्वीकार कर उसपर खरी भी उतरी। उन्होंने ही आपके माता पिता को भी इसके लिए मनाया और आप लग गयी अपने सपनो को साकार करने में। आप उन्ही महान पर्वतारोही के सानिध्य में रही जिन्होंने भारत को महिला पर्वतारोही के रूप में पहचान दिलाई जिन्हें देश का हर नागरिक बखूबी जानता है…

खुदे न माँजी

खुदे ना माँजी तु
मीन बग्वाल्युं मा नी आंण।
सबसे बडु त्योहार उरयुं
मीन लाम मा जांण।बैरी त्वाक लग्युं च
आंण कुन ये छाल।
त्यार दुध क सौं छन मांजी
मीं बंणी जौलु वैकुन काल।पोच पिट्ठु कमर कस्युं
कांध मा धरीं रैफल च।
बैर्युं पर टक हे बुये
दिन रात मेरी लगीं च।मी औलु त ठीक हे बुये
नी ओलु तु रोई ना।
बार त्योहारु मा खुद मा मेरी
मांजी आंसू बगैयी ना।मेकु त्योहार बडु अयुं च
मांजी देश क बार्डरु मां।
तेरी दुधी कु लाज रखुल
बैर्युं तै मिटोलु मां।खुदे ना मांजी तु
मीन बग्वाल्युं मा नी आंण।
सबसे बडु त्योहार उर्युं
मीन लाम मा जांण।सर्वाधिकार सुरक्षित @फौजी भयुं तै समर्पित लेख सुदेश भट्ट "दगड्या"

भूख

कलम को शब्दो की भूख
शब्दो को अहसास की भूख
अहसास को आधार की भूख
आधार को सम्मान की भूख
भूख -भूख -भूख
कभी न मिटने वाली भूखतन को चाहत की भूख
चाहत को समर्पण की भूख
समर्पण को रिश्तो की भूख
भूख-भूख-भूख
कभी न मिटने वाली भूखनाम की भूख,काम की भूख
मान की भूख,सम्मान की भूख
तन की भूख,मन की भूख
भूख -भूख-भूख
कभी न मिटने वाली भूख
रामेश्वरी(सुनीतानादान)

भुला तू डैरी न

बरखा बत्वांणी से
भुला तु डैरी ना
दुश्मनु की गोली से
पिछने तु ह्वैई ना।मट्यल ह्वै जा भले जिकुड़ी
पिछने तु देखी ना
गढवाल की शान छे तु
बैर्युं तै तु छोड़ी ना।तोप टैंक बैर्युं क तु
कुणज सी तोड़ी दे
बंकर बैर्युं क भुला
तिमलु सी तु फोड़ी दे।बिकराल भैरों बंण जा भुला
डौंड्या नरसिंग बंण जा तु
भीयुं बण जा बैर्युं क बीच
जड़फती तौं उपाड़ी दे।बद्री विशाल धै लगांणु
गढवली बीर सिपैयुं तै
जिकुड़ी ह्वै जा मट्यल भुला
पर बैर्युं तै तु छोड़ी ना।गढवली कुमौं क बीर
उत्तराखण्ड की शान छ्या
बॉर्डर मा भारत क
डांड्यू जन खड़ छ्या।बैरी आलु रस्ता मा तु
कीड़ो सी पतेड़ी दे
गढवली खुन छे तु
बैर्युं तै जतई देबरखा बत्वांणी से
भुला कबी डैरी ना
दुश्मनु की गोली से
पिछने कबी.....सीमा पर तैनात  फौजी भयुं तै समर्पित पंक्तियां लेख..@सुदेश भट्ट"दगड्या"

ऐ कायर पाकिस्तान!!!

जी तो करता है ऐ कायर पाकिस्तान,
आज तेरा इतिहास लिख दू।
रज में मिला तुझे कही ऐसा न हो,
खगोल भूगोल तेरा मैं बदल दू।बस अपनी खुशकिस्मती समझ तू,
कि मैं भारत जैसे शांतिप्रिय देश से हूँ।
नही तो सच कहता हूँ मेरा बस चले,
तो मैं तेरा इस धरती से नामो निशां मिटा दू।तेरी इस कायराना हरक़त का तुझसे,
गिन गिन मैं बदला लू।
मेरे जवान तो शहीद हुए है,
तुझे मैं नर्क में भी जगह न मिलने दू।हर बार न पृथ्वीराज तुझको मिलेगा,
जो तुझे हर बार माफ़ करेगा।
सच कहता हूँ मुझे मौका मिला तो,
तुझे कीड़े मकोड़ो के जैसे मसल दू।मेरे सब्र की हद तो अब पार हो गयी,
न मुझे और उकसा कही तेरा सर न कुचल दू।
अपने इतिहास में झाक ले एक बार,
कही तेरा इस बार उससे से भी बुरा हस्र न कर दू।जय हिन्द जय भारत अनोप सिंह नेगी(खुदेड़)

हिंदी

चलो वर्षभर में एक बार ही सही,
आपने मुझे याद तो कर लेते हैं।
साल भर से सोए लोग भी,
दो शब्द मेरे लिए बोल लेते हैं।सदियों से बेसुध पड़ी मैं,
वर्ष भर में एक बार उबासी भर।
लेती हूं हमें हिंदी ही तो हूं,
जो अंग्रेजी की बेड़ियों में बंधी हूं।अपना सको तो अपना लो मुझे,
वरना बेचारों की गिनती में तो मैं आज भी हूं।
अपने ही मुल्क में बेगानी सी रहती हूं,
हरपल घुटी घुटी सी जी रही हूं।बस कुछ दशक बाकी है मेरे,
अब पीढ़ी दर पीढ़ी मुझे धकेला जा रहा।
अजनबी को अपना, मुझे अजनबी किया जा रहा,
अब तो बस लगता है अंत मेरा आ रहा।
अनोप सिंह नेगी(खुदेड़)
9716959339

महादेवी वर्मा

महादेवी वर्मा
आँसू का मोल न लूँगी मैं !

यह क्षण क्या ? द्रुत मेरा स्पंदन ;
यह रज क्या ? नव मेरा मृदु तन ;
यह जग क्या ? लघु मेरा दर्पण ;
प्रिय तुम क्या ? चिर मेरे जीवन ;

मेरे सब सब में प्रिय तुम,
किससे व्यापार करूँगी मैं ?
आँसू का मोल न लूँगी मैं !

निर्जल हो जाने दो बादल ;
मधु से रीते सुमनों के दल ;
करुणा बिन जगती का अंचल ;
मधुर व्यथा बिन जीवन के पल ;
मेरे दृग में अक्षय जल,
रहने दो विश्व भरूँगी मैं !
आँसू का मोल न लूँगी मैं !

मिथ्या, प्रिय मेरा अवगुण्ठन
पाप शाप, मेरा भोलापन !
चरम सत्य, यह सुधि का दंशन,
अंतहीन, मेरा करुणा-कण ;

युग युग के बंधन को प्रिय !
पल में हँस 'मुक्ति' करूँगी मैं !
आँसू का मोल न लूँगी मैं !


कुछ याद आया जी हां ये कविता है महान लेखिका व कवियित्री स्वर्गीय श्रीमती महादेवी वर्मा जी की उनका आपका जन्म पर्रुखाबाद उत्तर प्रदेश में 26 मार्च 1907 हुआ  प्रयाग महिला विद्यापीठ में प्रधानाचार्य व कुलपति के पद पर भी  रही इलाहबाद विश्वविद्यालय से संस्कृत में एम ए किया १९३६ में नैनीताल से २५ किलोमीटर दूर रामगढ़ कसबे के उमागढ़ नामक गाँव में महादेवी वर्मा ने एक बँगला बनवाया था। जिसका नाम उन्होंने मी…