Skip to main content

चीनी मिथ ज़हर

*आरोग्यं -- चीनी एक जहर है जो अनेक रोगोँ का कारण है ।
.
चीनी बनाने की प्रक्रिया मेँ गंधक का सबसे अधिक प्रयोग होता है । गंधक माने पटाखोँ का मसाला ।
.
गंधक अत्यंत कठोर धातु है जो शरीर मेँ चला तो जाता है परंतु बाहर नहीँ निकलता
.
चीनी कॉलेस्ट्रॉल बढ़ाती है जिसके कारण हृदयघात या हार्ट अटैक आता है
.
चीनी शरीर के वजन को अनियन्त्रित कर देती है जिसके कारण मोटापा होता है
.
चीनी रक्तचाप या ब्लड प्रैशर को बढ़ाती है ।
.
चीनी ब्रेन अटैक का एक प्रमुख कारण है
.
चीनी की मिठास को आधुनिक चिकित्सा मेँ सूक्रोज़ कहते हैँ जो इंसान और जानवर दोनो पचा नहीँ पाते
.
चीनी बनाने की प्रक्रिया मेँ तेइस हानिकारक रसायनोँ का प्रयोग किया जाता है
.
चीनी डाइबिटीज़ का एक प्रमुख कारण है
.
चीनी पेट की जलन का एक प्रमुख कारण है
.
चीनी शरीर मे ट्राइ ग्लिसराइड को बढ़ाती है
.
चीनी पेरेलिसिस अटैक या लकवा होने का एक प्रमुख कारण है
.
चीनी बनाने की सबसे पहली मिल अंग्रेजोँ ने 1868 मेँ लगाई थी । उसके पहले भारतवासी शुद्ध देशी गुड़ खाते थे और कभी इस तरह से बीमार नहीँ पड़ते थे ।
.
चीनी से मिश्री पे आएँ और मिश्री से गुड़ पे आएँ.
दिखावे पर मत जाओ अपनी अकल लगाओ!
चीनी, कैँडी और च्युइँगगम का प्रयोग बंद करो और यदि मीठा खाना ही है तो गुड़ खाओ!
जानिए चीनी का प्रयोग कैसे हानिकारक है और गुड़ किस प्रकार लाभदायक है! पढ़िए और SHARE करे!
1- चीनी मिलें हमेशा घाटे में रहती हैं। चीनी बनाना एक मँहगी प्रक्रिया है और हजारों करोड़ की सब्सिडी और चीनी के ऊँचे दामों के बावजूद किसानों को छह छह महीनों तक उनके उत्पादन का मूल्य नहीं मिलता है!
2-चीनी के उत्पादन से रोजगार कम होता है वहीं गुड़ के उत्पादन से भारत के तीन लाख से कहीं अधिक गाँवों में करोड़ों लोगों को रोजगार मिल सकता है।
3- चीनी के प्रयोग से डायबिटीज, हाइपोग्लाइसेमिया जैसे घातक रोग होते हैं!
4-चीनी चूँकि कार्बोहाइड्रेट होता है इसलिए यह सीधे रक्त में मिलकर उच्च रक्तचाप जैसी अनेक बीमारियों को जन्म देता है जिससे हर्ट अटेक का खतरा बढ़ जाता है!
5-चीनी का प्रयोग आपको मानसिक रूप से भी बीमार बनाता है।
6-गुड़ में फाइबर और अन्य पौष्टिक तत्व बहुत अधिक होते हैं जो शरीर के बहुत ही लाभदायक है!
7-गुड़ में लौह तत्व और अन्य खनिज तत्व भी पर्याप्त मात्रा में होते हैं!
8- गुड़ भोजन के पाचन में अति सहायक है। खाने के बाद कम से कम बीस ग्राम गुड़ अवश्य खाएँ। आपको कभी बीमारी नहीं होगी!
9-च्युइँगगम और कैँडी खाने से दाँत खराब होते हैं!
10-गुड़ के निर्माण की प्रक्रिया आसान है और सस्ती है जिससे देश को हजारों करोड़ रुपए का लाभ होगा और किसान सशक्त बनेगा!


सोशल मीडिया से प्राप्त 

अनोप सिंह नेगी(खुदेड़)
९७१६९५९३३९ 

Comments

Popular posts from this blog

Kangni kauni कंगनी कौणी

कंगनी, काकनी, कौणी Foxtail मिलेटएक ऐसी फसल जो लगभग धरती से समाप्त हो चुकी है यदि इसके प्रति हम लोगो मे जागरूकता होती, तो शायद आज इसकी ऐसी हालत देखने को नही मिलती। यू तो हम पेट भरने के लिए स्वाद के लिए मार्किट में उपलब्ध कई खाद्य पदार्थो को खाते है। यदि मार्किट में कुछ नया आता है तो उसे एक बार जरूर ट्राय करते है। लेकिन ऐसी पौष्टिक खानपान की वस्तुओं को अक्सर शक की नजरों से देखते है कि पता नही इसके कोई साइड इफ़ेक्ट न हो कुछ गलत न हो जाये। लेकिन यदि यही चीज़ यदि मार्किट में इसकी साधारण अवस्था के बदले किसी आकर्षक पैकेट में बंद मील उसपर एक्सपायरी लिखी हो चाहे वो दुबारा रिपैक ही क्यों न कि गयी हो, उसके पौष्टिक गुणों को निकालकर क्यो न हमारे आगे परोसा जाए हम बहुत जल्द उसपर भरोसा कर लेते है। इसका उदाहरण होर्लिक्स जैसे चीजे है, जिसमे मूंगफली से उसके सारे पौष्टिक गुण निकालकर उसकी खली हमारे बीच खूब परोसी जाती है। यदि मूंगफली सीधे खाने को बोला जाए और कोई सड़क किनारे बेच रहा हो तो हम उसे शक भरी निगाहों से देखते है कि पता नही ठीक है या नही है, ऐसे बहुत से विचार मन मे उठते है। चलिए अब बात करते है आज की ऐ…

Fingr Millet Raagi mandua मंडुआ

मंडुआ/ रागी Fingr milletनमस्कार दोस्तों मेरे पास वनस्पतियों पर काफी लेख है किन्तु कुछ मित्रो के आग्रह परआज मैं बात करने वाला हूँ एक बहुत ही फायदे वाले ओषधीय गुणों से भरपूर अनाज कि। इसे मधुमेह के इलाज़ के लिए रामबाण माना जाता है और इसकी पुष्टि विज्ञान भी कर चुका है। मधुमेह(शुगर) के रोग से ग्रस्त लोगो के लिए आज के समय में इसके आटे से निर्मित बिस्कुट भी मार्किट में उपलब्ध है। तो चलिए दोस्तों अब बात करते है इस अनाज के बारे में। 
दोस्तों आज बात कर रहा हूँ मैं मंडुआ/रागी की। यूं तो मंडुआ विलुप्त होने लगा है लेकिन बीमारियो के इलाज़ के लिए इसकी मार्किट में मांग बढ़ने के कारण एक बार फिर से अस्तित्व में आने लगा है। इसकी मांग न सिर्फ भारत में बल्कि भारत से बाहर भी काफी मात्रा में है। मंडुआ आज की फसल नहीं है यह तो आज से लगभग 3000 ईसा पूर्व की फसल है। इसे हम सिर्फ अनाज के रूप में ही नहीं बल्कि औषधि के रूप में भी जानते है, और जो नहीं जानते है अब इसे पढ़ने के बाद वो भी जान जायेंगे। यदि इस अनाज को रोजगार से जोड़कर देखा जाये तो काफी बेहतर परिणाम देखने को मिलेंगे। आगे आप आगे पढ़ेंगे इसके महत्व इसे पोषक तत्व …

Timru Timur Zanthoxylum Alatum टिमरू

टिमरू/ टिमुर Zanthoxylum Alatumनमस्कार दोस्तो सबसे पहले कल के लेख में हुई गलती के लिए क्षमा चाहता हूँ उस लेख में मैंने मालू के अंग्रेजी नाम को ZanthoxylumAlatumलिखा था। और दूसरा उसकी कीमत मैने जो बताई थी वो कीमत टिमरू के फल की है। क्योकि कल मैं एक लेख खत्म कर चुका था और दूसरा लिख रहा था गलती से मैंने इसे वहां लिख दिया यहाँ लिखने की बजाय।
आशा करता हूं आप मेरी इस गलती को माफ करेंगे। अब आज टिमरू की ही बात मैं इस लेख में कर रहा हूं, आइए जानते है टिमरू के क्या उपयोग है और ये कहा कहा पाया जाता है। टिमरू बहुत कम लोग इसे जानते होंगे किन्तु जो पहाड़ो से संबंध रखते है वो इसके बारे में जरूर जानते होंगे। यह एक झाड़ीदार कांटेदार पौधा है जिसका अध्यात्म और अषधियो में उपयोग होता है। जो नही जानते तो वो भी इसे जान लेंगे यदि आपने गांव में कोई शादी अटेंड की होगी तो अब जान जाएंगे। दूल्हे को हल्दी लगाने, नहाने और आरती उतारने के बाद उसे पीले कपड़ो में भिक्षा मांगने को भेजा जाता है, एक झोली और एक लकड़ी का डंडा उसके पास होता है ये वही लकड़ी का डंडा होता है जिसके बारे में अभी हम जानेंगे। इसका उपयोग इतने तक ही सीमि…