Yes, I am failure, hear me roar In every step, I stumble and fall I've tasted defeat, its bitter gall My dreams lay shattered on the floor. I've tried my best, or so I thought But the world …
5 नवम्बर को दिल्ली के वेस्ट विनोद नगर के बद्रीनाथ पार्क में 2 बजे से उत्तराखंड स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में उत्तराखंड राज्य निर्माण के शहीदों व उत्तराखंड के जननायकों को समर्पित एक भव्य सांस्कृतिक क…
आइए,जड़ों से शाख तक पहुंचें.. उत्तराखंड आज से नहीं पौराणिक काल से ऋषि- मुनियों, तपस्वियों, साधकों की शरण स्थली रहा।महर्षि व्यास से लेकर कालांतर में आदिगुरु शंकराचार्य,स्वामी विवेकानंद , महात्मा गांध…
भट्टक डुबुक( कुमाउँनी भाषा) सौमान एक ब्याल भट्ट एक चमच जिर पांच क्वास लासणक थोड़ हरीं धणि तीन हरीं खुश्याण एक मुट्ठी चावों (लटपट हुण लिजि) लूँण सवादक हिसाबेल तरिक रात भर भट्ट भिगे लियो। …
कै गौं जाण? ✍️ ©®सुनीता ध्यानी. कोटद्वार बटि सुबेर 6 बजि रोडवेज चल त सवारि भौत जादा नि छाइ... हर खिड़की पर एक सवरि बैठीं छै... कखि-कखि म तीन सीटों म द्वी सवरि छाया| सवरियों म कुछ ज्वान नौंनूँ न त कं…
घास अर घस्येरि एक दा गौं कि बेटि-ब्वारि घास ल्याणा खुणि ईड़ाडाँड जयीं छैं.(ईड़ाडाँड हमर इनै मर्चुला-शंकरपुर सड़को मथि जो डांडु च वैखण ब्वल्दि, यो कार्बेट पार्क कु ही अंतर्गत च|) यख कुँमौ-गढ़वाळ या …
होली हो............. स्नेह अमी मैं पी जाऊँ तो, उर में सुख की डोली हो। उर की कटुता मिट जाये तो, उर की पावन होली हो।। सबमें छुपा हुआ जो सुर है, उसका मैं दर्शन…
गढ़वाली भाषा साहित्य में नन्दन राणा 'नवल' जी का चमकदार प्रवेश। कल २२/०४/२०२१ को चंद्रनगर रुद्रप्रयाग निवासी शिक्षक नन्दन राणा 'नवल' जी का गढ़वाली काव्यसंग्रह 'कुछ त हो' लोक…
शुभ हो होली.......... अरे सुखों की द्वार खड़ी देखो रंगोली, थाल सजाकर देवगणों की आई टोली । होगा हृदय मुदित पाकर सुखों की गागर, देखो अप्रतिम सुख लेकर आई है होली।। सजे नेह के मधु रंगों से उर की…
How to Make Rhododendron Juice नमस्कार दोस्तों बसंत ने दस्तक दे दी है और फूलदेई का त्यौहार भी हम मना चुके है और फूलदेई बसंत ऋतू का स्वागत में मनाया जाता है। यह मौसम हर ओर रंगो की छटा बिखेरे …
घेरा... गढ्विळ कथा संग्रै लिख्वार- # मनोज भट्ट ‘‘गढ़विळ’’ #घेरा कऽ लब्यता उफन से पैलि मि आप थैं यीं पोथी अन्वार बिंगाणु छौं. य अन्वार बणयीं च चित्रकार #कुंवर रवीन्द्र जी कि. ब्वा क्य बुन कुंवर …
क्या करें............? पावन गणतंत्र दिवस पर मेरे मन का प्रश्न मुझसे..... गण का तंत्र चलना चाहिये तो था मगर, भीड़ का तंत्र चलने लग गया तो क्या करें? देश के लिये जो कानून जरूरी है बहुत, उसी पर…
किसे कह रहे साल नवल...... भारत माँ कहती है बेटा, किसे कह रहे साल नवल। लहर शीत की थमी नहीं है, गगन नहीं है अभी धवल ।। दिनकर का भी नहीं हुआ है, उत्तर दिग…
दुर्गम तीर्थ स्थल यमुनोत्री भारत के उत्तराखंड में यमुनोत्री गंगोत्री बद्रीनाथ व केदारनाथ की यात्रा बड़ी सुखद है। पुराण शास्त्रों में इन पवित्र तीर्थों के बारे में व्यापक महत्व-चर्चा है।…
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