सागर के दोहे............ १- हँसकर मेरे गाँव का, कहता फूल बुराँस । आयेगी रे लालिमा , रखना उर में आस ।। २- बूढ़े , बालक साथ में, करते भो…
मेरे दोहे 1-मक्खी ढूँढे गन्दगी,अलि ढूँढे मधुपान | ढूँढे से दोनों मिलें,अपना-अपना ग्यान || 2-ब्रह्म घड़ी में जो उठे,वो पाये आनन्द | सागर ऊषा में खुलैं,हरि द्वार जो बन्द || 3-माँ की ह…
डा०विद्यासागर कापड़ी के दोहे १-घन तू बैरी हो गया, पिय तो हैं परदेश । उमड़-घुमड़ तू गगन में, खोल रहा है केश।। २-घन तू होके बावरा , …
मेरे दोहे 1-कौन देखता घन यहाँ ,कौन झूलता डाल | धन की गठरी बाँधते ,बुनते सब जंजाल || 2-घन ही तो करते यहाँ ,धरणी का श्रिंगार | मुस्काते हैं खेत सब ,हँसती वट की डार || 3-घन की चादर ओढ़कर…
मेरे दोहे 1-बनी रहे नित आपके ,अधरों पर मुस्कान | नित रसना करती रहे,केशव का गुणगान || 2-ऐक दिया भी तम गहन ,देता है नित चीर | ऐक मनुज यदि ठान ले ,खींचे नई लकीर || 3-खाली धरती ना रहे ,लगे…
कुछ दोहे 1-बहुतेरे पग खींचते, दूजा बढ़ता देख | सागर कहिए क्या भला, एेसी जड़ता देख || 2-मोदी के कायल हुये,सकल जगत के देश | भारत का भाने लगा, सबको ही परिवेश || 3-सकल जगत में हो रहा, भा…
मेरे दोहे 1-पथ में मित्र अमित्र का, कब रहता है भान | जब पग में काँटा चुभे ,तब होती पहचान || 2-जो माँ देती अन्न को, जो देती है नीर | जो उसको गाली करे, तन को डालो चीर || 3-कब तक सैनिक…
चौमासी दोहे 1-वृक्ष धरा की साँस हैं,जीवन के हैं मूल | इनको जो है काटता , करता भारी भूल || 2-यदि तुम काटो एक वृक्ष ,दस को देना रोप | होगा प्रलय अन्यथा , होगा भू पर कोप || 3-खूब लगान…
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