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Showing posts from June, 2017

Meri Dadi मेरी ददी

दगड़्यौं बुढ बुढ्यौं ख्याल रख्याँ ह्वाँ,  कुछ लैन ददी (दादी)  पर आज...
"मेरी दादी"
हे राम भगवान् ,
अछै, कख चली जांदू हैं इंसान। बुनै मेरी ददी(दादी) ब्वोदी छै,
पीड़ा मा कणौंदी कबर्यौं रोंदी बी छै।
बुबा रे म्यरा खुट्टा पट्टकै दे,
छुछा रे मेरू मुंडु दबै दे ।।
खांदी ह्वोंदी मीतैंई, दादी ब्वोदी छैई,
तमाखु पे पेई सर्या राति कटदी छैई।
अर फजल्येकी फिर से रक रक रक,
पुंगड़्यौं मा खट्ट कट्ट, सुपन्या रोप्वदी छैई ।
मेरी ददी ना सची, भौत भली छैई।।
दादी का हथ्यौं मा, भली रस्याण।
द्वी गफ्फा जरा बिन्ढी खयेंदू छौ,
जैदिन दादीन फाणु अर झंगोरू बणाण।
तैड़ू, गींठी च्यूँ की भुज्जी तवा मा लपटौंदी छैई,
पाणी कु बंठा मुंडा मा धैरी, तंगत्याट कैरि लौंदी छैई।।
स्वचदू कबर्यौं दादी बचीं होंदी इबारी,
सून्न नी प्वड़दी गौं मा हमरी चौक, डंड्याली। दादी तेरू भलु मयालु पराण,
हमुन बी त तेरी उम्र मा आण।
सदनी कैल यख बच्यूँ रैण,
जन अयाँ वन्नी खाली कर्म लिजाण।
हे पितृ द्यव्तौं, तुम कृपा बणै रख्यान,
कुटुंब परिवार सुखी रख्यान,
सद्बुध्दि सब्तैं द्यान।।
स्वरचित/**सुनील भट्ट**
02/05/2017

Mait Ki Beti Si Pran मैत की बेटी सी प्राण

मैत की बेटी सी
परांण हुयुं म्यारु
लौंकदी कुयेडी मा
टक गौं लग्युं म्यारु
मैत की बेटी सी
परांण हुयुं म्यारु
ककडी मुगरी बुये
फंची मा बंधणी ह्वेली
दीदी कुन सुसरास लखै
मेकुन जुगै कन धनी ह्वेली
मैत की बेटी सी
परांण हुयुं म्यारु
बाट दिखंणा ह्वैली बुये
धार मा यैकी मेरी
यख बी लोंकी कुयडी
जिकुडी झर्र झुरांणा मेरी
मैत की बेटी सी
परांण हुयुं म्यारु
मांण भरीक घी बुये
मैकुन जुगांणा ह्वैली
कब आल नौकर्या लाटु
सार लगीं ह्वैली
मैत की बेटी सी
परांण हुयुं म्यारु
गाड गदनों क यख बी
हुयुं खुब सुंस्याट
गौं की लगंणी खुद दीदों
अर जिकुडी मा धकध्याट
मैत की बेटी सी
परांण हुयुं म्यारु

सर्वाधिकार सुरक्षित @सुदेश भट्ट "दगड्या" एम ,एस चौहान दगड्या

Kashmir कश्मीर

नमस्कार दोस्तों आज आप लोगों के आशिर्वाद से कश्मीर पर कविता लिखने जा रहा हूं ,.....

कश्मीर जो भारत का शीश हुआ करता था,
स्वर्ग से भी प्यारा जो कश्मीर हुआ करता था ,
कश्मीर हिमालय भारत का जो अपना था,
लाल बहादुर का जो प्यारा प्यारा सपना था,
कश्मीर की धरती खून से लतपत हो गई है ,
भारत भूमी अपनी किस्मत पर क्यों रो रही है, हर दिन फौजी मरते हैं ,
मवेशी इन्सां से डरते हैं ,
हर जगह कब्र समसान बना है,  देश का मुकुट सुनसान बना है,  हिंसा पे हिंसा होती रहती है ,
बस करो अब भारत माता कहती है ,
इसीलिए दिल्ली को समझाने आया हूं ,
जलतै कश्मीर का दर्द बताने  आया हूं || मजहब के ठेकेदारों ने ,
हिंसा की बाजारों में ,
मजहब का जो राष्ट्र बनाते ,
कश्मीर में चांद सितारे लहराते,  तिरंगा छुपा रहता है मेजों मे,
कश्मीर बंटा है आज देशों में , फूल भी खिलने से डरते हैं,  कश्मीर में जो जन रहते हैं,  स्वाभिमान जो मन में भरते हैं ,
रोज इनके सपने क्यों मरते हैं,  विधवाओं के हाथ सूने रहते हैं
जो चार दिन पहले चूड़ी पहनते हैं,
में उनकी पीड़ा को सहलाने  आया हूं,
जलते कश्मीर का दर्द बताने आया हूं कश्मीर भारत का खाता है ,
चांद…

Chal Re Dagdya दगड़्या चल रे

दगड़्या चल रे......
दगड़्या चल रे........,
दगड़्या चल रे, तू अर मीई..
फँखुड़ी लगैकि द्वीई.......
कखि उड़ि जौंला...........,
हम द्वियों जुगा, रईं नी य दुन्य
सरग फर उड़दा उड़दा
गैंणा बणि जौंला........,
दगड़्या चल रे........

झूटौं गौलि सिंओल म
सच की जीभ चिफल्हेणी चा
रे सच की जीभ...........,
ज्यालि मनिख्यों की झिंकड़्यों म.....
सकिलि खुटि अल्झेंणी चा
रे सकिलि खुटि...........
काँड्यों दुपे दुपे ग्ये य जिकुड़ि.........
कनुक्वे यों तैं छड़ौंला ....
कखि उड़ि जौंला ........  


बाला खुछिलि नि पै,
ज्वनि सौंजण्या नि मीलु...
बुढ़ि उमरि कु स्हारु नि राई...
जै अजाण तैं स्हारु द्ये ज्वनिम..
पछ्याण ह्वेकि त्यारु म्यारु नि राई....
अजाण बणिकै सह्येन्दु नीछ.
पछ्याण ह्वेकि मुख कखजि लुकौंला ......
रे कखि उड़ि जौंला......

त्येरि जीणौं लालसा अबि..
मैकु म्वरणौं डैर लगींचा.....
तु त् निझरक छै भितनै छुचा
मनख्यात् कि ताँद भैर बँधीचा...
सरैल यखुली छुटि नि जै यख
दगिड़ि म्वरला त् ज्यूँदा बि रौंला..............
रे कखि उड़ि जौंला ......

दगड़्या चल रे, तू अर मीई..,
फँखुड़ि लगैकि द्वीई......
कखि उड़ि जौंला.........
हम द्वियों जुगा, रईं …

Maa Aansu Mat Bahana माँ आंसू मत बहाना

इस बार जाने दे देश के लिए मैने, देश से किया जो वादा है। फिर लुंगा कोख से जन्म तेरे, ये मेरा तुझसे वादा है।
हो जाऊंगा अगर शहीद तो, आँसू मत बहाना तू। बस कर देना हंस के विदा, इन हाथो से सहलाके तू।
माँ मै ये जानता हूं, तू आँसू जरूर बहाएगी। देख तिरंगे पे लिपट के आया, तू छाती पीट के रोएगी।
मुझे कसम है तेरी माँ, तिरंगे को न झुकने दुंगा मै। मिट जाऊंगा खुद मै मगर, देश को न झुकने दुंगा मै।

                          सर्वाधिकार सुरक्षित बीरेन्द्र सिहं बिष्ट

Ghutya Putya घुट्या पुत्या

घुट्या पुत्या

घुट्या पुत्या पाटी अर बुखल्या कम्यडु खडिया हरचिन दगडया कच्ची एक पक्की एक धारों धारी गेन एल.के जी यू.के.जी नर्सरी ह्वेन ईमला निबंध हरची सुलेख अंग्रेजी क जमन मा हरची आलेख पहाडा बैराखडी हरची सिलेट बुये बाब ह्वेगेन मम्मी डैड चटाई हरची यैगेन कुर्सी बगदी हवा मा मौडर्न गुरजी गुणा भाग क कठिन सवाल मौबेल मा हल करना छन गुरजी


हरची पंद्रह अगस्त २६ जनवरी गांधी जयंती की प्रभात फेरी शहीदों की हुंदी छै गौं गौं मा जय जयकार गौं गौं मा घुमदी छे स्कूल्यों की टोली पैली निशुल्क शिक्षा लालटेन बाली क रात मा भी पढांद छ्या गुरजी अब त चंट छात्र भी तबी पास ह्वालु जब ट्युसन पढण कुन गुरजी म जालु घुट्या पुत्या पाटी बुखल्या कम्यडु खडिया हरचैन दगडया कच्ची एक पक्की एक धारों धारी गेन एल.के जी यू.के.जी नर्सरी.......

सर्वाधिकार सुरक्षित @लेखक सुदेश भटट(दगडया) की प्रकाशनाधिन पुस्तक "धै"बिटी साभार

Nantinaon Re नानतिनाओं रे

नानतिनाओ रे' (कुमाउनी कविता)

- पूरन चन्द्र काण्डपाल

नानतिनाओ रे, हमारा नानतिनाओ रे, पिछाड़ि झन रया दुनिय दगै जाओ रे,
अगास में उड़णियां पंछी कणी देखो, उड़नै उड़नै आपणि मंजिल पुजिगो, वीक चार तुम आपण लक्ष्य बनाओ रे..पिछाड़ि झन....
नि करला काम तुम पिछाड़ि रै जला, देशा का दुश्मण तब अघिल न्है जला, ओ देशा का सपूतो कदम उठाओ रे...पिछाड़ि झन...


मैक दूद पे छ वीकि कसम तुमु कैं, बाबू क संदेश कि कसम तुमु कैं, घर- गौं- इलाकौ क नाम कराओ रे...पिछाड़ि झन...
देशा का शहीदों कणी तुम झन भुलिया, जां उनार कदम पड़ीं जागी चूमि लिया, और गीत छोड़ो गीत देशा का गाओ रे...पिछाड़ि झन...
देश की आन बान का रखवाला तुमें छा, देश कैं बनूणियां दिलवाला तुमें छा, अगास में तिरंगै कैं तुम फहराओ रे...पिछाड़ि झन...
हमारा नानतिनाओ रे पिछाड़ि झन रया दुनिय दगै जाओ रे ।

सर्वाधिकार सुरक्षित पूरन चन्द्र काण्डपाल 26.06.2017

Maityun Ki Khud Ma मैत्युं की खुद मा

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मैत्यु की खुद म

सौण की रुण झुण बरखा म बैठियु छौ यखुलि घोर म बर्खा की टप टप बूंद देखि खुदेणु छौ मैत्यु की खुद म डांडी काण्ठियों म कालि कुरेड़ी चम्म लैगे, गौं गला बुड्या ब्वै बाबू की याद ऐगे। बैठिया होला दाना सयणा अपड़ि निवति कुणेठी म बर्खा की...............................
भैजी भुला जागणा होला धियाण मैत आली, भुला का गला भ्येन्टेक हाथु म राखड़ी पैराली। एक मूट चीनी की रखलि चम भुला की घीचि म बर्खा की..................................
यखुलि बैठिक मैत ख्यालू म ख्वेगे, सोण की बरखा भागली पिछने बिटि कृष्ण जन्माष्ठमी ऐगे। सन्क्वाल मैत जोलू काखड़ी मुंगरी खोलू गैल्याणि का गैल म बर्खा की .................................


तौं डांडियों का पार मेरु मैत भलु रौतियालु होलु हे घणा बादल छांटा ह्वै जावा मेते मेरु मैती मुल्क दिखेलु । तुमुतै खबर नि सेत मैं बैठियु छौ बस यीं आस म बर्खा की .................................

बादळून भि पुकार सुणि सि भी छांटा ह्वै गिनी, मैत की डांडियों म चम सूरज की किरण लैगिनि। मैत द्वी दिन कू समाज कु फर्ज रण हमेशा अपड़ि ही ससुराल म बर्खा की................…

Kui ni yakh apnu कुई नि यख अपणु

कुई नि यख अपणु सभी बिरणा ही छन,
भलु बगत फर सब तेरा बुरु बगत फर कुई नि छन।
बिन उज्यला कु त छैल भी दगुड़ छोड़ दींद,
फिर मनखी त मनखी ही छन।अपणु दुःख लगौ भी त कैमा लगौ,
सभी यख हैसणो तैयार बैठ्या छन।
बगत च तुमरु खूब हैंसी ल्यावा दी,
कुई तुम फरै भी हैसणो तैयार बैठ्या छन।मेरी मज़बूरी च कि मी रोयी भी नी सकणु छौ,
आंखी त आंसू न मेरी भी पट्ट भोरी छन।
यूँ आंसू थै सुदी खैति की भी क्या कन,
खरीदणो खु जब लोग तैयार हुया छन।रुआँसी गौली न बोली भी नि सकणु छौ,
गिच्ची खोलदु त गौली, जिकुड़ी तैयार हुया छन।
जोड़ी की त मेरु भी भौ कुछ धर्युं छौ,
झणि किलै आज सबी मी देखि लुकणा छन।अनोप सिंह नेगी"खुदेड़"
9716959339

Development Delhi डेवलॉपमेंट दिल्ली

कुरच्याट देखी क लगणां यन दुनिया यै ग्या जन दिल्ली मा मैट्रो की सौल दुंली आज मीन भी देख्याल दिल्ली मां
राजीव चौक बिटी  भितरी भितर कखन कख पौंछी ग्यो मी दिल्ली मा कुरच्याट देखी क लगंणा यन दुनिया यै ग्या जन दिल्ली मा मैट्रो की भीड मा सीट मिली जन संजीवनी बुटी मिली ग्या दिल्ली मा अफु चलदी सीढी रिंग यैगै देखी दिल्ली मा

कुरच्याट देखी लगणा यन दुनिया यै ग्या......




रात मा भी घाम जन लग्युं ह्वा यीं दिल्ली मा कबरी स्यांद हंवाल भग्यान लोग यी डयबलपमेंट दिल्ली मा सुबेर बिटी ब्याखन तक रिटदी रै ग्यों दिल्ली मा सौल सी कन घिर्यों भितरी भितर दिल्ली मां कुरच्याट देखी क लगणा यन दुनिया यैग्या जन...... लिख्वार@सुदेश भटट(दगडया)

Mi we mulka ku chhau मी वे मुल्का कु छौ

"मिं वे मुल्क कु छोऊं जख डांडी कांठी बच्यांद--- " @ संदीप रावत ,श्रीनगर गढ़वाल | (प्रवक्ता रसायन ,रा0इ0कॉ0धद्दी घंडियाल, बडियारगढ़) -----------------------------------------------------------------         मी वे मुल्क$ कु छोऊँ जख डांडी काँठी बच्यान्द हवा गीत लगान्द अर  डाळी साज बजान्द. मुंड मा हिमालै कु मुकुट सज्यूं पैतळ्यूं हरि -हरद्वार  बनी बनी की छन जैड़ी -बूटी, बनी -बनी फूल- फुल्यार सडकयूं का उंचा-निसा घूम पुंगडी -पठाली भली सुहान्द मी वे मुलक$ कु छौऊँ जख डांडी -काँठी बच्यान्द---- द्वादश ज्योतिर्लिंग केदार जख  भू बैकुंठ धाम $ ऋषि मुनि द्यो- द्यबतौं की धरती जै देव भूमि बोलदान गंगा जमुना कु मैत जख ,ज्योत अखंड जगी रान्द मी वे मुल्कू कु छोऊँ जख डांडी -काँठी बच्यान्द-------  



हिंसोला- किन्गोड़ा, तिमला, काफल कर हिंस्वाली कि मिठास छ्युतम्यळि,आडू,-अखोड, सीमळा कु कनु भलु चलमुळु स्वाद बारा बनी की रस्याळ सक्या मनख्यूं की बढान्द मी वे मुल्कू कु छौऊँ जख डांडी काँठी बच्यान्द----- लगदा मडाण, नचदन पण्डौं झमकदो झुमैलो झुमान्द भला -भला गीतों का झमकों मा मनखी खैरी अपणी भुलान्द कफू, हिल…

Mait ki Khud मैत की खुद

हफ्ता मैना उब वैगी माँजी मै गों गल्ला म श्वाचणु छूं कन वल्ला भै भैणा म्यारा माँजी मै खुद म खुदेणु छू सुबिऐरियों उठिक मोल पात घासक मैं जान्दू छूं घर ऐक सासु मुख देखी माँ जी मै सासु चित बुजोणु छूं जब फोन आंन्दू माँ जी सासु काम सुणोणी च आँसू पीक स्वार बुलैक                                                                  माँ त्वै तै खुजोणो छूं 



मैत की खुद माँ जी आज भी लगी च मै मैना आइया वे नी माँ जी मै खुद म खुदैणु छूं जिन्दगी भर त्वीन पालियों आज कियेक सारा भैजियों खियाना वल्ला भै भैणा मियरा माँ जी मै खुद म खुदैणु छूं बार तिवार ऐगी माँ जी मन मियेरू बटासिऐगी स्वार मियेरू मैत लगीयों माँ जी मै खुद म तुम्हारी खुदैणु छूं अपरी विपता देखिक माँ जी त्वै म सब कुछ बतोणु भेजी बुल्ला म नी सुणे माँ जी हाथ जवेडी ब्वानु छूं अफुरू ध्यान रखदी रै माँ जी मै अफुरू रखणु छूं माँ तियेरी ममता मै पर लगीं आज भी मै जाल्डू छूं अब नी सामथ्र माँ जी कि कुछ अगनी लिखलु मै खुद म तुम्हारी माँ  जी खुद म खुदैणु छूं मैत की खुद म खुदैणु छूं

नोट -सर्वाधिकार प्रीतम विद्वान  घनसाली अखोडी  धार गों

Maa ki khud part 2 माँ की खुद भाग 2

हे मां त्वै बिना
आंखी नम हुंयी च
    सुबेर श्याम फोटो तेरी
    मेरी जिकुडी धरीं च
आंदी बगत मांजी तीन
लगै द्या बिदकी क पिटयी
   आंखी तेरी भी भरीं छै
   मां मीन भी चिताई
मुंड मलासी क मा तु
मीतै पैटाणा रैयी
    बस मा नी बैठी जब तक
     तु धार बीटी दिखणा रैयी
हे मां त्वै बिना
आंखी नम हुंयीं च
    तेरी चुडा बुखाणु की
    मां याद भौत आंद
घुंड घुंडीयुं बर्फ मा जब
डयूटी लगी जांद
हे मा त्वै बिना...........
          सर्वाधिकार सुरक्षित....सुदेश भटट(दगडया)

Maa ki khud part 1 माँ की खुद भाग १

परदेश मा नौकर्यों की
बडुल्युं की खुद च मां
बेट्युं कुन लुटीर कुटीर
च्युडा बुखांणु की खुद च मां
नयी नयी रीतुओं की
नौ नवांण की खुद च मां
मैत की बेट्युं की खुद
सबसे बडु सारु च मां
झपलंगी डाळी छैलु जन
प्यार दुलार की डाळी च मां
रुड्या बटोयी की सुकीं सांकी कुन
बांज की जड्युं सी ठंडु पाणी च मां
बार त्योहार मा श्वाल पक्वडी
भरीं रुट्युं की रस्यांण च मां
सुसरास पैटदी बेट्युं कुन
अर्सों की ड्वलणी कल्यो च मां


चैत की घुगती की घुर
लोंगदी कुयडी की खुद च मां
बसकल्या सुंस्याट गदन्युं क
मेरी जिकुडी की खुद च मां
म्वाळ पन जुगयीं ककडी
अर घीय की गुंदकी च मां
च्युडा बुखांण अर भुज्यां भट्टु की
नौकर्यों कुन प्यार की फंची च मां
परदेश मा नौकर्यों की
बडुल्युं की खुद च मां
बेट्युं कुन लुटीर कुटीर
च्युडा बुखांणु की खुद...


सर्वाधिकार रक्षित@लेख सुदेश भट्ट"दगड्या"