रावण तु आज बल जग जगा फूंक्यांणा होली परबात फिर कखी न कखी टुपली पैरीक पैदा ह्वे जैली कु मारी सकदु दीदा त्वै बाहुबली मनखी तै परबात भ्रष्टाचार बणी की तु फिर पैदा ह्वै जैली पैली त्यार …
हैंसदी रै ख्यल्दी रै, टिकुली बिंदुली चमकदी रै, मुंड मा सिंदूर तेरो, फूलु सी डाली हैंसदी रै। द्वी हथी चुडयुं न भरै, हतेली मा मेहंदी रचदी रैन, नाक मा फुल की चमक, ख...
टुटदी तिबरी,उजड्यू खण्ड, क्या इलै ही मांग उत्तराखण्ड? लोग परदेशों मा बस्या, रयु क्या वे उत्तराखण्ड? खाणी-सीणी परदेशों मा, पिकनिक खुणि उत्तराखण्ड? धुरपालि की पाल टुटी, देली म...
ये कविता सुदेश भट्ट "दगड्या" जी की अपने ननिहाल गांव डिवरण (देवराना ) पर समर्पित है जरूर पढ़े......... रौंत्यालु उल्यारु दीदों, हपार भग्यान गांव च। मेरी ब्वै कु मैत प्यारु, मेरी नन्युं गांव…
ऊचु पहाड़ बण्युचा मंदिर तेरु माँ ऊचु पहाड़ बण्युचा मंदिर तेरु माँ दर्शनों खु तेरा माता भक्त आया छा दर्शनों खु तेरा माता भक्त आया छा ऊचु पहाड़ बण्युचा मंदिर तेरु माँ ऊचु पहाड़ ब...
पंछियों का गुनगुनाना पेड़ों की छाँव है हिमायल की गोद में बसा ओ मेरा गाँव है, गांव गाँव मंदिर सजे हैं घर घर में राम है हिमालय मुकुट जिसका गंगायमुना शान है हिमालय की गोदी में बसा ओ मेरा गाँव है, वीर वीर…
कसम छन भयुं तुम कुणै यैंसु क साल बार त्योहारु मा नी खरींदण बरै मैड ईन चैना कु माल हमरी खैकी यु हमतै यी डमणु च हमर पैसों न बम ग्वाला पाकिस्तान भिजंणु च यैंसु की बग्वल्युं मा दी...
शब्दों की माया ========== शब्दों कु भी अपड़ू एक जग जहाँन छः !! शब्द ही एक ब्यक्तित्व की पहचान छः !! शब्द ही पड़े जांदन मनख्यों की मनोदशा मनख़्यों की हंशी ख़ुशी और जीवन ब्यथा !! शब्द ही ...
चलो बेटे-बेटी का अंतर मिटाये, चलो दोनो को समान शिक्षा दिलाये। चलो बेटे को इस लायक बनाये, दहेज के लिय वो हाथ न फैलाये। चलो बेटी को इस काबिल बनाये, दहेज की बेदी पर जलायी न जाये। चल...
भाई सुदेश भट्ट "दगड्या" जी की वीररस भरी कविता जो सरहद पर तैनात सैनिको को समर्पित है। या आऊंगा ओढ तिरंगा, या फहरा कर आऊंगा, दुश्मन का तोड़कर बंकर, रण जीतकर आऊंगा। अंतिम डग पग और सा...
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