मित्रो इस बार आप सब से अनुरोध है चाइना की लड़ियों का बहिष्कार करे, उन गरीब मजदूरो के बारे मे सोचे जो रात भर जागकर मिट्टी के दीये बनाते है। इस दीवाली दीपो से रोशन करे घर आँगन को . इ...
भाई सुदेश भट्ट "दगड्या" द्वारा रचित एक कविता जिसमे उन्होंने स्वर्गीय श्री चन्द्रसिंह राही को अपने शब्दों में श्रद्धांजलि दी। कन निर्मोही ह्वे तु हे बिधाता आज राही जी तै ल...
नमस्कार दोस्तों आज एक नयी अभिव्यक्ति से आपको परिचय करवा रहा हूँ ये ऐसे व्यक्तित्व के धनि है शायद जो परिचय के मोहताज़ नही इनकी लेखनी ही इनकी सबसे बड़ी पहचान है। कभी-कभी कुछ अजीब हो जाता है उन अजीब घटनाओ…
दोस्तों आज बहुत दिनों बाद किसी के बारे में लिखने का मन हुआ आज मैं ऐसी शख्सियत के बारे में लिख रहा हूँ जिनका आज जन्मदिन है। लगभग तीन वर्ष पूर्व मैं मैं इन महान व्यक्तित्व से जुड़ा जिनका नाम है पर्वतारो…
खुदे ना माँजी तु मीन बग्वाल्युं मा नी आंण। सबसे बडु त्योहार उरयुं मीन लाम मा जांण। बैरी त्वाक लग्युं च आंण कुन ये छाल। त्यार दुध क सौं छन मांजी मीं बंणी जौलु वैकुन काल। पोच पिट्ठु कमर कस्युं कांध मा …
कलम को शब्दो की भूख शब्दो को अहसास की भूख अहसास को आधार की भूख आधार को सम्मान की भूख भूख -भूख -भूख कभी न मिटने वाली भूख तन को चाहत की भूख चाहत को समर्पण की भूख समर्पण को रिश्तो की भूख भूख-भूख-भूख कभी…
बरखा बत्वांणी से भुला तु डैरी ना दुश्मनु की गोली से पिछने तु ह्वैई ना। मट्यल ह्वै जा भले जिकुड़ी पिछने तु देखी ना गढवाल की शान छे तु बैर्युं तै तु छोड़ी ना। तोप टैंक बैर्युं क त...
जी तो करता है ऐ कायर पाकिस्तान, आज तेरा इतिहास लिख दू। रज में मिला तुझे कही ऐसा न हो, खगोल भूगोल तेरा मैं बदल दू। बस अपनी खुशकिस्मती समझ तू, कि मैं भारत जैसे शांतिप्रिय देश से हू...
चलो वर्षभर में एक बार ही सही, आपने मुझे याद तो कर लेते हैं। साल भर से सोए लोग भी, दो शब्द मेरे लिए बोल लेते हैं। सदियों से बेसुध पड़ी मैं, वर्ष भर में एक बार उबासी भर। लेती हूं हमे...
महादेवी वर्मा (२६ मार्च १९०७ — ११ सितंबर १९८७) महादेवी वर्मा आँसू का मोल न लूँगी मैं ! यह क्षण क्या ? द्रुत मेरा स्पंदन ; यह रज क्या ? नव मेरा मृदु तन ; यह जग क्या ? लघु मेरा दर्पण ; प्रिय तुम क्या …
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