सागर का गीत............ (पिया के लिए) मथूँ री दही मैं पिया के लिए । जलाऊँ अधर पर हँसी के दिये ।। मथूँ री दही मैं पिया के लिए ।। गऊ से पिया का है नाता बहुत । माखन पिया क…
जयति जय भारती माते....... जयति जय भारती माते , जयति जय भारती माते । जयति जय भारती माते, जयति जय भारती माते।। हो सुरों की पूजनीया माँ, नरों की अर्चनीया हो । माँ जनती राम और मोहन, जगत की वं…
हे गिरिधारी............. हे गिरिधारी,हे गोपाला । तुम ही हो जग के प्रतिपाला।। जगती को संकट ने घेरा । कहीं न दिखता देव सवेरा ।। धरती होगी रीती नर से ? करिये आकर पार भँवर से ।। हे मधुसूद…
पत्थरों से भी निकलते गीत हौसला गाने का होता है तभी , पत्थरों से भी निकलते गीत हैं | जो समझलैं ये भी दिए भगवान ने शूल से भी तो निकलती प्रीत है || नित चलाये जिसने तीखे वाण ही , उर समझता ही रहे वो म…
गीत हे वीणापति हे वीणापति,क्या करूँ अर्पन तुम्हें माँ | उर के गीतों का ही नित वंदन तुम्हें माँ || हे वीणापति,क्या करूँ अर्पन तुम्हें माँ || माँ तुम बसी हो लेखनी में जानता हूँ | सिर पर तेरा नित हाथ…
गीत प्रेम के गाते हैं तम को हरने आओ मिलकर, छोटा दीप जलाते हैं | उर की कटुता का भंजन कर, गीत प्रेम के गाते हैं || हम गीत प्रेम के गाते हैं || यह तन तो माटी का पगले , …
गीत था हृदय में दम्भ मेरे भर गया, और मैं विजय की कामना करता रहा | परिमल से भरे सुमनों की चाह में, शूलों से ही मैं सामना करता रहा || दुत्कार कर द्वार आये भिक्षु को, देवों की ही मैं अर्चना करता र…
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