Skip to main content

Posts

Showing posts from March, 2018

Ni Mildu नि मिल्दु

नि मिल्दु न चुल्लू मिल्दु, न चुल्लो आग मिल्दी,
न दाजी की अगेठी मिल्दी, न अगेठी रंगुणु मिल्दु।न मूला की थिचवाणी मिल्दी न मूला कु साग मिल्दु,
न डिगची कु झुंगरु मिल्दु, न पतेला कु भात मिल्दु।न ब्वाडा कु रेडू मिल्दु, न रेडू का सेल मिल्दा,
न काका कु जाल मिल्दु, न जालो माछा मिल्दा।न काकी की दथुड़ी मिल्दी, न डांडियू घास मिल्दु,
न गागर मिल्दी, न पंदेरू पाणी मिल्दु।ना घासा गडोली मिल्दी, न घसेन्यु की टोली मिल्दी,
न हैल मिल्दु, न हैला का जुआ लाठ मिल्दा।न जंदरू मिल्दु, न जंदरा का पाट मिल्दा,
न उरख्यलु मिल्दु, न गंज्यला मिल्दा।न गौड़ी भैंसु को रामणाट मिल्दु, न ढेबरा बखरो कु दुदराट मिल्दु,
न कीला ज्युड़ा मिल्दा, न छन-गोठयार मिल्दा।
        यख मिल्दु त बस!!!!खौन्दार कुड़ी, बांजी पुंगड़ी, बांदरो को जबलाट, मुसो कु दुदराट, सुनसान गाँव, झुमझाम पहाड़,
वीरान डाँडी, सूखी नयार, आणमिला सा मनखी अर सूखा गाड़ धार!!!!!

अनोप सिंह नेगी(खुदेड़)
9716959339

Rajju Bisht रज्जु बिष्ट

बाँदु का लस्का ढस्का देखी औला
दिल मेरु खुदेणु चा हे रेणु तेरी याद मा
सतेश्वरी तेरी माया मा बौल्या बणी ग्यु
तेरा बाना सोचणु रौ
पदम सिंह गाड़ी लेई खेतुसैण बटी
बस मा किलै नि राई
हाथा कु रुमाल छुटिगे पानी पंदेरे मा
हाथ मा मोबाइल पौड़ी बाजार
त्यारा सौ मि त्वेतै इतगा प्यार करुलु
माटा की मटुकी गोरख्यो की चेली सांतुला         ये सभी गीत शायद आपने खूब सुने होंगे लगभग एक-दो  दशक पहले ऐसे गीतों को उस वक्त खूब सराहा जाता था। पहाड़ो में ये आवाज खूब गुंजा करती थी, लेकिन जब कुछ दौर बदला कैसेट ने सीडी की जगह ली सीडी ने डीवीडी और फिर मोबाइल में मेमोरी कार्ड ने और अब तो सबकुछ यूट्यूब तक ही सीमित रह गया।
इन गीतों के नाम पढ़कर शायद आप समझ ही गये होंगे कि आज मैं बात करने वाला हूं एक ऐसे लिख्वार की एक आवाज के धनी गायक की जिसे मैं कभी व्यक्तिगत तो नही मिला लेकिन इनके गीतों को खूब सुना करता था। दोस्तो ये है उत्तराखण्ड के गायक रज्जु बिष्ट जी। ऐसे तो इनके गीत सभी बेहतरीन है। जिनमे संदेश होता है, लेकिन आज मैं बात करने वाला हूं उन गीतों की जो उत्तराखण्ड में पहाड़ो में खूब गूंजते थे। शादियों में म्यूज़िक बैंड में खू…

Maa माँ

मेरी यह रचना समर्पित मेरे उन साथियो को जो परदेशो में दूर है अपने परिवार से खासकर उनको जो अपनी माँ से दूर है।
आशा है मेरी ये रचना आपको पसंद आएगी।हैरान हूं परेशान हूं,
जो सोचता हूं सब विपरीत ही पाता हूं।
मैं तुझसे तू मुझसे है क्यों दूर,
आज तक समझ नही पाया हूं।वो सब तो है मेरे पास,
जो मैं पाना चाहता हूं।
जाने फिर भी क्यों तुझसे दूर रहता हूं,
बस यही सोचकर मैं खोया सा रहता हूं।नजाने कब वो दिन आएगा,
कि मैं तेरे पास आ जाऊ।
गोद मे तेरे सर रखकर,
तुझसे खूब बतलाऊ।हा तू 'माँ' ही तो है मेरी!
तुझ बिन अब मैं रह नही पाता हूं।
बस कुछ मजबूरियां है मेरी,
जो तुझसे दूर रहने पर मजबूर हो जाता हूं।मुझे देख देख तू जिया करती थी,
आज तुझे देख मैं जीना चाहता हूं।
अब तेरे पास हमेशा के लिए,
लौट मैं जाना चाहता हूं।अनोप सिंह नेगी(खुदेड़)
9716959339

Red Rice लाल चावल

लाल चावल Red Riceनमस्कार मित्रो आज बात करेंगे एक ऐसे अनाज की जो लगभग देशभर में ही नही पूरे संसार मे सभी जानते है और सभी खाते भी होंगे। बस रूप और गुण भिन्न हो सकते है। जी हां दोस्तो आज बात करेंगे चावल की। यू तो चावल को अधिकतर बीमारी के रूप में ही जाना जाता है किंतु आज हम इसके दोषों के आगे बढ़कर इसके गुणों की बात करेंगे। चावल भी वो जो विश्व प्रसिद्ध है इस चावल को हम रेड राइस के नाम से अधिक जानते है। चावल की विश्वभर में व्यावसायिक खेती की जाती है ये तो आप सभी जानते ही होंगे।
उत्तराखण्ड में शादी के समय भी इस चावल का खूब प्रयोग किया जाता है।
लाल चावल जिसे पौष्टिक रूप में सबसे बेहतर पाया जाता है, ये भारत मे पहाड़ी राज्यो के अलावा झारखंड, तमिलनाडु, केरल व बिहार में अधिक पाया जाता है। इस चावल की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में खूब मांग रहती है। भारत मे लाल, बैंगनी, भूरे व हरे चावलों का उत्पादन किया जाता है। उत्तराखण्ड में मुख्य रूप से लाल चावल की खेती की जाती है। केरल व तमिलनाडु में लाल चावल को उमा नाम से जाना जाता है।
अन्य चावलों की पॉलिशिंग के समय मे कम हो जाते है, जबकि लाल चावल में ये …

Hum Ta pardeshi chha हम त परदेशी छा

कड़ुआ मगर सच भाग - 4हम त परदेशी छा
हम पलायन की बात नि करूला,
चाहे स्यख डुट्याल बसी जा,
किलैकि की हम परदेशी जु छा।हम गिच्चू भी नि उफरुला,
चाहे सर्या पाहड़ बिकी जा,
किलैकि हम त परदेशी जु छा।हम डाम कु विरोध भी नि करूला,
चाहे गौ का गौ डूबी जा,
किलैकि हम त परदेशी जु छा।हम चकबन्दी की मांग नि करूला,
चाहे पुंगड़ी बांजी रै जा,
किलैकि हम त परदेशी जु छा।हम अपणी भाषा भी बिसरी जौला,
चाहे हमरी उत्तराखण्डी भाषा मंथा से मिटी जा,
किलैकि हम त परदेशी जु छा।                  पर
तुम त कुछ करा कुछ न सै पर
स्यु गुणी बांदरो थई हका ल्या
तुम त स्यख रैकी भी पुंगड़ी बंज्याणा छा।तुम त अपणा गौ मुलुक म रैणा छा,
कम से कम अपणी बोली भाषा मा बच्यावा,
तुम स्यख रैकी भी अपणी भाषा मा नि बच्याणा छा।अनोप सिंह नेगी(खुदेड़)
9716959339

Kulath Horse Gram कुलथ गहथ

गहत गैथ कुलथ कुल्थी horse gramनमस्कार दोस्तो आप दाल तो लगभग रोज ही खाते होंगे कम से कम दिन में एक बार। लेकिन शायद आपको यह नही पता होगा कि इनके क्या फायदे हो सकते है। अक्सर हम जब भी बीमार होते है तो डॉक्टर मूंग की दाल या मूंग दाल की खिचड़ी खाने को ही कहते है, आखिर ऐसा क्यों इसमे कुछ तो बात होगी। तो आज हम बात करेंगे एक ऐसी दाल की जो मूंग तो नही लेकिन औषधीय गुणों से भरपूर है।
जी दोस्तो आज बात करूंगा कुलथ/ गहत/Horse Gram की नाम पढ़कर बहुत से मित्र समझ चुके होंगे इसके क्या क्या फायदे है। गहत की विश्व मे 240 प्रजातीया है जिनमे से 23 प्रजातियां भारत मे उपलब्ध है, और बाकि अफ्रीका में। मुख्य रूप से अफ्रीका ही इसका स्रोत माना जाता है। कुलथ उत्पादक देश
भारत के अलावा इंडोनेशिया, श्रीलंका, भूटान, नेपाल, चीन, अफ्रीका में भी गहत का उत्पादन किया जाता है। यदि भारत की बात करे तो भारत मे भी लगभग सभी राज्यो में कुलथ का उत्पादन होता है। भारत मे कुलथ का उत्पादन करने वाले कुछ प्रमुख राज्य जैसे कर्नाटक 28%, तमिलनाडु 18%, उड़ीसा 10%, आंध्र प्रदेश 10%, महाराष्ट्र 10% का उत्पादन करते है। गहथ की दो मुख्य प्रजातिय…

Semal cotton tree Bombax सेमल कॉटन ट्री

सेमल कॉटन ट्री सेमर कंद Red Silk cottonआज एक ऐसे वृक्ष के बारे में बात करने जा रहा हूं जो कि स्वास्थ्य के लिए एक लाभदायक वनस्पति है जिसका औषधि के अलावा अन्य प्रकार से भी उपयोग में लाया जाता है।
आज बात करेंगे उत्तराखण्ड में में होने वाली वनस्पति सेमल कि ये उत्तराखण्ड में ही नही बल्कि देश मे लगभग सभी जगह मिल जाता है।
सेमल भारतीय मूल का वृक्ष है और यह वृक्ष भारत के साथ साथ बांग्लादेश, श्रीलंका, पाकिस्तान, जावा, सुमात्रा, उत्तरी ऑस्ट्रेलिया, म्यांमार आदि देशो में भी पाया जाता है। मूलतः सेमल समुद्र तल से लगभग 1500 मीटर की ऊँचाई वाले स्थानों पर पाया जाता है।
यू तो उत्तराखण्ड में इसका प्रयोग सब्ज़ी और आचार तक ही सीमित है किंतु यदि इसको व्यावसायिक स्तर पर किया जाए तो इसका फैब्रिक में दवाइयों में उपयोग होता है और ऐसी संस्थाओ या कंपनी से संपर्क किया जा सकता है। सेमल को साइलेंट डॉक्टर के नाम से भी जाना जाता है। सेमल के बारे में शायद बहुत कम लोग जानते होंगे कि इसका वर्णन हिन्दू धर्मग्रंथों में भी देखा गया है। सेमल का वैज्ञानिक नाम बॉम्बैक्स सेइबा
यदि बात करे सेमल की आयुर्वेद के क्षेत्र में तो इ…

Kadhi Patta Murraya koenigi गुंदेला कढ़ी पत्ता

कढ़ी पत्ता   गुंदेला   Murrayakoenigiकढ़ी पत्ता एक ऐसी वनस्पति जिसके बारे में लगभग सभी लोग जानते होंगे, ये आपको अधिकतर बाजार में मिलने वाली नमकीन में मिल जाएगा। किसी भी सब्ज़ी में डाल दो सब्ज़ी का स्वाद ही बदल देता है। इसे Murrayakoenigii, बर्गेरा कोएनिजी(Bergerakoenigii), चल्कास कोएनिजी (Chalcaskoenigii) आदि नामो से भी जाना जाता है। यह Rutaceae कुल का पौधा है।
इसका स्वाद मैने पहली बार भोपाल में चखा था मैं जबलपुर आर्मी कैण्ट में एलडीसी का एग्जाम देने गया था, अचानक ही वहां से मौसी के घर जाने का मन हुआ जो कि भोपाल में रहती है। मैंने घर फोन किया और पहुँच गया मौसी के घर अरेरा कॉलोनी हबीबगंज रेलवे स्टेशन के नजदीक ही है। अगले दिन मैं सुबह वहां प्रियदर्शनी मार्किट थी वहां पहुँचा मैंने पोहा नाम पहली बार सुना तो मन हुआ स्वाद लिया जाए मैंने एक प्लेट पोहा लिया और बहुत ही ध्यानपूर्वक खाने लगा स्वाद को समझते हुए सबकुछ इसमे समझ आ रहा था लेकिन एक स्वाद समझ नही आया तो मैंने दुकान वाले से पूछ ही लिया कि ये हरे से पत्ते क्या है? तो जवाब मिला कढ़ी पत्ता अब मेरे लिए उस वक़्त ये नाम भी नया था। मुझे लगा कढ़ी में…