लिख रही हुँ एक सपना एक हकीकत ऐ जिन्द्गी तेरे लिए कलम की वसीयत रामेश्वरी नादान
वो चल रहे थे इस कदर गजब नज़ारे ढा गये। दुनिया ने चलना छोड़ दिया,मुर्दो पे प्राण आ गये।। तेरे इन शब्द भेदी बाणों से। दिल घायल हो गया मेरा। तरकस में मेरे तीर नहीं । मैं कायल हो ग...
आँखियूं आँखियूं मा सनकै ग्ये वा, प्रेम का बाटु बिरड़ै ग्ये वा | वीं क माया मा मि चकोर सि रो फफड़ाट कनु , टम,सिकर्या बणि क टमकै ग्ये वा || सर्वाधिकार सुरक्षित दिवाकर बुड़ाकोटि
मै फूलों पर था तो लोग आहें भर रहे थे,, आज.......................फूल मुझ पर क्या गिरें अपनो ने मुहँ मोड़ा, और.......….................. आसमान रोने लगा, देवेश आदमी
मेरे टेढ़े-मेढ़े शेर 1-उसके बगैर अधूरा सा सावन लगता है, उसके बगैर अधूरा सा दर्पन लगता है| चले तो जाता हूँ मैं बागवाँ गुलाब में, पर उसके बगैर कहाँ मेरा ये मन लगता है || 2-ऐ ईश, यौवन की वो सारी बातें…
गम को साथी बना लिया तोड़कर दिल हमारा भला तूने क्या पा लिया तूने कुछ पाया हो-न-हो हमने तो गम पा लिया अब तो इस गम को हमने अपना साथी बना लिया ऐ बेवफ़ा तुझको हम पहचान न सके तूने अब तो हमसे मुह मोड़ लिया हम…
दीपक रावत की कलम से मेरी हर पन्नों पर लिखी हुई मोहब्बत और दर्द की कहानी होगी पढ़ना इन पक्तियों दिल से छुपी हुयी इनमें मेरी जवानी होगी
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