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Showing posts from May, 2017

एक चुभन

एक चुभन

एक सत्य वाकये पर आधारित यह कविता लिखने की प्रेरणा मिली बलोड़ि जी से जो काफी समय के पश्चात् अपने पुत्र को गाँव लेकर गए वहा अपने मकान के हालात देखे और बोल उठा देखो पापा का मकान गिर गया। बलोड़ि जी को चुभी वह बात और उन्होंने मकान बनवाना शुरू कर दिया। दोस्तों कही आप सबके साथ भी ऐसा न हो इसलिए ध्यान रखे मकान को घर बनाने का प्रयास जरूर करे।


वो देखो पापा का मकान गिर गया
एक चुभन हुयी हृदय में और मकान फिर से बन गया
मकान तो बना किन्तु घर कब बनेगा?
शायद उसे फिर एक सवाल करना पड़ेगा।


काश! खेत भी उसे दिखाया होता!
कह देता खेत पापा का बंज़र पड़ गया
फिर से एक चुभन होती खेत आबाद होता।
देख लेता अगर वो सूखी पड़ी नदी को!
कहता पापा की नदी सूनी पड़ी है
फिर एक चुभन होती नदी छलछला उठती।

देख लेता वो बर्बाद उन जंगलो को! कहता देखो जंगल पापा का जल रहा
फिर एक चुभन होती जंगल लहरा उठता।
देख लेता जो समूचे उत्तराखण्ड को!
कहता पापा का उत्तराखण्ड खण्ड खण्ड हो रहा
फिर चुभन होती और उत्तराखण्ड अखण्ड हो उठता।

अनोप सिंह नेगी(खुदेड़)
9716959339

मेरु प्यारु उत्तराखण्ड

मेरु प्यारु उत्तराखण्ड,
किलै हुयु व्हालु उतणदण्ड।
चारो तरफ बांजी पुंगड़ी,
अर उज्ड़या छन खण्ड।घर गांव छोड़ी की,
पोड़्या छन निछन्द।
खैति की सर्या ज्वनि,
अर बुडेंदा फीर उत्तराखण्ड।बूढ़ बुडड़ी रै गेनी गांव मा,
चिमोड़ा पोड़या मुख फंड।
ज्वान लग्या एक हैका मेस मा,
सटकण लग्या परया प्रदेश फंड।गंगा जमुना का मैत मा,
तिसालु च सर्या उत्तराखण्ड।
देवता भी अब बौग सरणा,
छोड़ी की जाणा अब उत्तराखण्ड।मेरु प्यारु उत्तराखण्ड,
किलै हुयु व्हालु उतणदण्ड।
चारो तरफ बांजी पुंगड़ी,
अर उज्ड़या छन खण्ड।
अनोप सिंह नेगी(खुदेड़)
9716959339

मेरी ब्वै का खैरी का आंसू

इस कविता को पढ़कर आपके आँखों के आंसू रुक नहीं पाएंगे इस रचना को पूरी जरुर पढ़े रचनाकार भाई सुनील भट्ट जी की इस कविता में जो दर्द है वो आपको अंदर तक झकझोर देगा एक बार रचना जरुर पढ़े 

  "मेरी ब्वै(माँ) का खैरी का आँसू"
(एक गढवली रचना सभी "माँवों" को  समर्पित)
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मेरी "ब्वै" का खैरी का आँसू छन ई,
म्यरा संभाली का धरयाँ छन ई, अपणी आँख्यूं मा।
अपणी खैरी काटणा कु।
अपणु बाऽलापन बटै ब्वै थै खैरी खांदू द्यखुदू ग्यौं मि,
अर यूँ आँसू थै एकैक कैक संभल्दी ग्यौं मि।
हमरा दुख मिटाणा का बाना खूब घिस्या ब्वै,
गरीबी का पाटों का बीच खूब पिस्या ब्वै,
हमथैं गुड़ा की ठुँगार देकी, अफु फीकी चा पेद्या,
अफु बाड़ी ख्या ब्वैन अर हमथै भात कु गफ्फा देद्या।
ग्वीराऽला कू डाऽल मा बटी, पत्त भुयाँ प्वाड़,
रूणी रयाई सरया रात बैठीक एक कुणा कु छ्वाड़।
वीं खैरी का आँसू छन ई,
म्यरा अपणी आँख्यूं मा संभाली का धरयाँ छन ई।
पटऽला सरीन लुखुंका ब्वैन भारू मुन्ढुमा ल्यान्दी देखी,
गात की ध्वतड़ी पस्यौ मा, खूब कैकी तरपान्द देखी।
खुदेड़ गीत सुणी ब्व…

वाह तेरी सोच ऐ इंसान wah teri soch ae insan

मेरी यह कविता एम्स अस्पताल में एक पांच वर्ष की छोटी सी बच्ची का ईलाज़ करवाने आये उस परिवार और उन जैसे और लोगो की सोच को समर्पित है किस तरह पाँच हज़ार का नाम सुनकर ब्रेन ट्यूमर का ईलाज़ करवाने से उन लोगो ने मना कर दिया सोच भी नहीं
ऐसे लोगो के घर बच्चे न हो ऐसी दुआ करता हूँ भगवान से। सकते। उनकी बातो से एहसास हुआ कि वो एक बेटी है इसलिए उन्हें उसके जाने का कोई दुःख नहीं होने वाला। चिकित्सको और वहा पर आये और लोगो ने बहुत समझाने की कोशिश की स्वयं मैंने भी लेकिन वो उस बेटी का दादा तैयार नही हुआ और उसने उस बेटी के पिता को फोन किया तो उसने भी ईलाज़ से मना कर दिया।



वाह तेरी समझ क्या हो गयी ऐ  इंसान,
पाँच हज़ार महंगे लगे सस्ती लगी बच्ची की जान।
दया भी न आयी तुझे उस छोटी सी जान पर,
कैसे इलाज़ से इंकार कर दिया पराया उसे मान कर।
शायद ये तेरी सोच की कमी थी,
या फिर पास तेरे धन की कमी थी।
पर न जानेे क्यों ऐसा मुझे लगा,
तुझे बेटी की नहीं सिर्फ बेटे की पड़ी थी।
चाहत तो उन आँखों में भी जीने की थी,
लेकिन तुमने तो पलभर में वो आँखे बन्द कर दी।
तुझसे अच्छे तो वो है जो भ्रूण हत्या करते है,
इस दुनिया में लाकर मरने…

मेरी दादी

सुप्रभात सभी मित्रों को आज 02/05/2017,
दगड़्यौं बुढ बुढ्यौं ख्याल रख्याँ ह्वाँ,  कुछ लैन ददी (दादी)  पर आज... "मेरी दादी"हे राम भगवान् ,
अछै, कख चली जांदू हैं इंसान।बुनै मेरी ददी(दादी) ब्वोदी छै,
पीड़ा मा कणौंदी कबर्यौं रोंदी बी छै।
बुबा रे म्यरा खुट्टा पट्टकै दे,
छुछा रे मेरू मुंडु दबै दे ।।खांदी ह्वोंदी मीतैंई, दादी ब्वोदी छैई,
तमाखु पे पेई सर्या राति कटदी छैई।
अर फजल्येकी फिर से रक रक रक,
पुंगड़्यौं मा खट्ट कट्ट, सुपन्या रोप्वदी छैई ।
मेरी ददी ना सची, भौत भली छैई।।दादी का हथ्यौं मा, भली रस्याण।
द्वी गफ्फा जरा बिन्ढी खयेंदू छौ,
जैदिन दादीन फाणु अर झंगोरू बणाण।
तैड़ू, गींठी च्यूँ की भुज्जी तवा मा लपटौंदी छैई,
पाणी कु बंठा मुंडा मा धैरी, तंगत्याट कैरि लौंदी छैई।।
स्वचदू कबर्यौं दादी बचीं होंदी इबारी,
सून्न नी प्वड़दी गौं मा हमरी चौक, डंड्याली।दादी तेरू भलु मयालु पराण,
हमुन बी त तेरी उम्र मा आण।
सदनी कैल यख बच्यूँ रैण,
जन अयाँ वन्नी खाली कर्म लिजाण।
हे पितृ द्यव्तौं, तुम कृपा बणै रख्यान,
कुटुंब परिवार सुखी रख्यान,
सद्बुध्दि सब्तैं द्यान।।स्वरचित/**सुनील भट्ट**
02/05/2017

बौड़ी सकदी बौड़ी जा

बौडी सकदी बौडी जा
अपणी छान पटाल्युं मा
बचपन फुक्यांणु दीदों
हपार रुड्या बडांगु माखंद्धार कुडी धै लगांणी
द्यवता घिर्यां छन आग मा
बुबा ददों की समळौंण फुकेंणी
बुये क पर्या छंचल्या सब आग माक्वांण मा छै ज्वा पाटी तेरी
वीं फर भी बडांग लगीं च
सैरा छोडी कुडी फुकेंणी
जन ज्यूंदी मुयळी हुयीं चलडबडी हुयीं च पस्यूंण हपार
मथी बीटी आग लौंकी च
बुबा ददों की समळौंण दीदों
रुवे रुवे की धै लगांणी चजौं भितर्युं मा ग्वै लगैन
वा आज त्वै खुज्यांणी च
मुंडळी सुदा खंद्वार कुडी
यखुली कन कंणाणी चकुटळी दथुडी दही की डखुळी
समळौंण बुये की धै लगांणी च
बारा नाजु की भग्यान दबली
आज कन भबत्यांणी चबौडी सकदी बौडी जा
अपणी छान पटाल्युं मा
बचपन फुक्यांणु दीदों
हपार रुड्या...... सर्वाधिकार रक्षित@सुदेश भट्ट"दगड्या"

मजदूर दिवस

ना सुख जांणी कबी दीदों
रैंदा घाम बरखा बत्वांण्यु मा
जेट की दुफरा मा कबी
कबी सौंण की कुयेडी मा
मन की खैरी पीडा अपंणी
कबी नी जतांदा तुम
सबुळ घंण तसला लेकी
रात दिन मिस्यां तुम
ना बगत पर कबी ध्याडी मिल्दी
सेठ सौकारु की ठगोण्युं मा
रात दिन मेहनत कर्दा
लरका तरकी पसीना मा
रेल लैन मौटर लेन
डाम बड बड बणांदा तुम
उदघाटन मा नेता यैथर
सबसे पिछने रैंदा तुम
मजदुर छे तु मजबुर छै तु
दुख बिपदों की फंची छे
त्वैन क्या जंण ए. सी पंखा
फिर भी देश की शान छे
पढै नी सकदी नौन अपर
हे दीदा तु बडी स्कूलों मा
हत्वड सबुळ गैंती फौळ
कुटुमदरी तै दींदी समळोंण मा
ना छुट्टी ना एतवार
क्या जंण  बार त्योहारु की
मजदुर ना मसीहा छ्या तुम
म्यार भारत देश का
ना सुख जांणी कबी दीदों
रैंदा बरखा घाम बत्वांण्यु मा
जेट की दुफरा मा कबी
कबी सौंण की कुयेडी.... मजदुर दिवस पर सभी मजदुर भाईयों को समर्पित @लेख ...सुदेश भट्ट"दगड्या"7534068566