मन लौट चला गांव में अपने मन में मैंने तेरे गीत लिखे। भावों को श्रृंगार कर प्रीत लिखे। छलती रही मन अंदर , कुंठाओं की मधुशाला , आह भरी मैंने जब भी , ध…
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