आवागमन ना जाने कितने जन्मो से संयोग बना है आपसे स्नेह ,प्रेम अपनत्व के रिश्ते जीवन भर साथ थे भूला नहीं बचपन अपना स्नेह,नेह का कलकल बहता था झरना जा रहे हो छोड़कर ! दुख होता है ,मन रोता है जानता हूँ मर…
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