Skip to main content

Posts

Showing posts from September, 2016

खुदे न माँजी

खुदे ना माँजी तु
मीन बग्वाल्युं मा नी आंण।
सबसे बडु त्योहार उरयुं
मीन लाम मा जांण।बैरी त्वाक लग्युं च
आंण कुन ये छाल।
त्यार दुध क सौं छन मांजी
मीं बंणी जौलु वैकुन काल।पोच पिट्ठु कमर कस्युं
कांध मा धरीं रैफल च।
बैर्युं पर टक हे बुये
दिन रात मेरी लगीं च।मी औलु त ठीक हे बुये
नी ओलु तु रोई ना।
बार त्योहारु मा खुद मा मेरी
मांजी आंसू बगैयी ना।मेकु त्योहार बडु अयुं च
मांजी देश क बार्डरु मां।
तेरी दुधी कु लाज रखुल
बैर्युं तै मिटोलु मां।खुदे ना मांजी तु
मीन बग्वाल्युं मा नी आंण।
सबसे बडु त्योहार उर्युं
मीन लाम मा जांण।सर्वाधिकार सुरक्षित @फौजी भयुं तै समर्पित लेख सुदेश भट्ट "दगड्या"

भूख

कलम को शब्दो की भूख
शब्दो को अहसास की भूख
अहसास को आधार की भूख
आधार को सम्मान की भूख
भूख -भूख -भूख
कभी न मिटने वाली भूखतन को चाहत की भूख
चाहत को समर्पण की भूख
समर्पण को रिश्तो की भूख
भूख-भूख-भूख
कभी न मिटने वाली भूखनाम की भूख,काम की भूख
मान की भूख,सम्मान की भूख
तन की भूख,मन की भूख
भूख -भूख-भूख
कभी न मिटने वाली भूख
रामेश्वरी(सुनीतानादान)

भुला तू डैरी न

बरखा बत्वांणी से
भुला तु डैरी ना
दुश्मनु की गोली से
पिछने तु ह्वैई ना।मट्यल ह्वै जा भले जिकुड़ी
पिछने तु देखी ना
गढवाल की शान छे तु
बैर्युं तै तु छोड़ी ना।तोप टैंक बैर्युं क तु
कुणज सी तोड़ी दे
बंकर बैर्युं क भुला
तिमलु सी तु फोड़ी दे।बिकराल भैरों बंण जा भुला
डौंड्या नरसिंग बंण जा तु
भीयुं बण जा बैर्युं क बीच
जड़फती तौं उपाड़ी दे।बद्री विशाल धै लगांणु
गढवली बीर सिपैयुं तै
जिकुड़ी ह्वै जा मट्यल भुला
पर बैर्युं तै तु छोड़ी ना।गढवली कुमौं क बीर
उत्तराखण्ड की शान छ्या
बॉर्डर मा भारत क
डांड्यू जन खड़ छ्या।बैरी आलु रस्ता मा तु
कीड़ो सी पतेड़ी दे
गढवली खुन छे तु
बैर्युं तै जतई देबरखा बत्वांणी से
भुला कबी डैरी ना
दुश्मनु की गोली से
पिछने कबी.....सीमा पर तैनात  फौजी भयुं तै समर्पित पंक्तियां लेख..@सुदेश भट्ट"दगड्या"

ऐ कायर पाकिस्तान!!!

जी तो करता है ऐ कायर पाकिस्तान,
आज तेरा इतिहास लिख दू।
रज में मिला तुझे कही ऐसा न हो,
खगोल भूगोल तेरा मैं बदल दू।बस अपनी खुशकिस्मती समझ तू,
कि मैं भारत जैसे शांतिप्रिय देश से हूँ।
नही तो सच कहता हूँ मेरा बस चले,
तो मैं तेरा इस धरती से नामो निशां मिटा दू।तेरी इस कायराना हरक़त का तुझसे,
गिन गिन मैं बदला लू।
मेरे जवान तो शहीद हुए है,
तुझे मैं नर्क में भी जगह न मिलने दू।हर बार न पृथ्वीराज तुझको मिलेगा,
जो तुझे हर बार माफ़ करेगा।
सच कहता हूँ मुझे मौका मिला तो,
तुझे कीड़े मकोड़ो के जैसे मसल दू।मेरे सब्र की हद तो अब पार हो गयी,
न मुझे और उकसा कही तेरा सर न कुचल दू।
अपने इतिहास में झाक ले एक बार,
कही तेरा इस बार उससे से भी बुरा हस्र न कर दू।जय हिन्द जय भारत अनोप सिंह नेगी(खुदेड़)

हिंदी

चलो वर्षभर में एक बार ही सही,
आपने मुझे याद तो कर लेते हैं।
साल भर से सोए लोग भी,
दो शब्द मेरे लिए बोल लेते हैं।सदियों से बेसुध पड़ी मैं,
वर्ष भर में एक बार उबासी भर।
लेती हूं हमें हिंदी ही तो हूं,
जो अंग्रेजी की बेड़ियों में बंधी हूं।अपना सको तो अपना लो मुझे,
वरना बेचारों की गिनती में तो मैं आज भी हूं।
अपने ही मुल्क में बेगानी सी रहती हूं,
हरपल घुटी घुटी सी जी रही हूं।बस कुछ दशक बाकी है मेरे,
अब पीढ़ी दर पीढ़ी मुझे धकेला जा रहा।
अजनबी को अपना, मुझे अजनबी किया जा रहा,
अब तो बस लगता है अंत मेरा आ रहा।
अनोप सिंह नेगी(खुदेड़)
9716959339

महादेवी वर्मा

महादेवी वर्मा
आँसू का मोल न लूँगी मैं !

यह क्षण क्या ? द्रुत मेरा स्पंदन ;
यह रज क्या ? नव मेरा मृदु तन ;
यह जग क्या ? लघु मेरा दर्पण ;
प्रिय तुम क्या ? चिर मेरे जीवन ;

मेरे सब सब में प्रिय तुम,
किससे व्यापार करूँगी मैं ?
आँसू का मोल न लूँगी मैं !

निर्जल हो जाने दो बादल ;
मधु से रीते सुमनों के दल ;
करुणा बिन जगती का अंचल ;
मधुर व्यथा बिन जीवन के पल ;
मेरे दृग में अक्षय जल,
रहने दो विश्व भरूँगी मैं !
आँसू का मोल न लूँगी मैं !

मिथ्या, प्रिय मेरा अवगुण्ठन
पाप शाप, मेरा भोलापन !
चरम सत्य, यह सुधि का दंशन,
अंतहीन, मेरा करुणा-कण ;

युग युग के बंधन को प्रिय !
पल में हँस 'मुक्ति' करूँगी मैं !
आँसू का मोल न लूँगी मैं !


कुछ याद आया जी हां ये कविता है महान लेखिका व कवियित्री स्वर्गीय श्रीमती महादेवी वर्मा जी की उनका आपका जन्म पर्रुखाबाद उत्तर प्रदेश में 26 मार्च 1907 हुआ  प्रयाग महिला विद्यापीठ में प्रधानाचार्य व कुलपति के पद पर भी  रही इलाहबाद विश्वविद्यालय से संस्कृत में एम ए किया १९३६ में नैनीताल से २५ किलोमीटर दूर रामगढ़ कसबे के उमागढ़ नामक गाँव में महादेवी वर्मा ने एक बँगला बनवाया था। जिसका नाम उन्होंने मी…