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Showing posts from February, 2018

होली

सभी मित्रों को होली की बहुत बहुत शुभकामनाएं
होली की हुड़दंड
गैल्यो का संग
गौ ख़्वालो मा
चौक तिबरी मा
बिखर्या बनी बनी का रंगचौदिशो रंगों की बहार च
दगड्यो की टोली रंगमत च
त्यौहार यू कुछ खास च
भरी पिचकारी रंगों की
अबीर गुलाल बी तैयार चगितेरू की टोली गीत लगान्द
नाची नाची की आनन्द उठान्द
चला पिचकारी उड़ावा गुलाल
करी द्या यूकी टोपली मुखडी लालअनोप सिंह नेगी(खुदेड़)
9716959339

Hisalu Rebus Elipticus हिंसर, हिसालू

नमस्कार दोस्तो आज का लेख कुछ लम्बा हो सकता है इसका कारण है।
मैं काफी समय से उत्ताखण्ड कि वनस्पतियों पर लेख लिख रहा हूं और इनमें ऐसे ऐसे जंगली फूल और फलों पर भी लिखने का प्रयास करता हूं। मैंने पाया कि जितने भी जंगली फल उत्ताखण्ड में स्वतः ही उग जाते है उनकी हम बिल्कुल भी कद्र नही करते। इनको रोजगार की दृष्टि से कभी न देखते हुए इनको झाड़ या काटे समझकर काट फेकते है। लेकिन आज मैं जिस जंगली फल की बात कर रहा हूं आप इसी से अंदाजा लगा लेंगे कि हम सदियों से अपना कितना नुकसान किये जा रहे है।
उत्ताखण्ड ऐसी जड़ी बूटियों फल फूल और ऐसे ही कई वनस्पतियों से परिपूर्ण है किंतु हम इनका सही उपयोग नही करते। आज जिस फल के बारे में मैं लिख रहा हूं इसका पूरे विश्व मे लगभग 580 टन उत्पादन किया जाता है, जबकि इस फल का उदगम ऐसिया से ही हुआ है। किन्तु भारत का इस लिस्ट में कही भी नाम नही है जबकि भारत के पहाड़ी क्षेत्रों में यह स्वतः ही उग जाता है, चाहे उत्तराखण्ड हो हिमाचल हो सिक्किम हो हर पहाड़ी क्षेत्रों में यह फल पाया जाता है।
अब बात करते है इस फल के बारे में दोस्तो यह एक जंगली कांटेदार पौधा है, बहुत ही छोटे कांटेद…

पत्रकार

कड़ुआ किन्तु सत्य
भाग - 3यह कविता चाटुकार पत्रकारों को समर्पित है सच्चे ईमानदार पत्रकार स्वयं को यहां न देखे।
पत्रकारकब तक लिखने के दाम लोगे
कभी तो मुफ्त में भी लिख दो
कब तक राजनीति की गोद मे झूलोगे
कभी जनता की भी तो सुन लो क्यो अफवाहों के रोज नए पहाड़ बना रहे हो
कभी तो सच्चाई की कलम दावत भी चुन लो
बेईमानो को ईमानदार बना रहे हो
जाने कितने में स्याही बेच रहे होकभी जरा ज़मीर अपना जगा तो लो
निर्दोष का साथ दोषी को सजा दिला दो
अमीरो के तो हर आँसू पोछने को तैयार रहते हो
किन्तु गरीबो की आँसू की कीमत क्यो नही पहचानते हो।अनोप सिंह नेगी(खुदेड़)
9716959339

Fiddlehead Fern लिंगुड़ा, लिगरी, pucuk paku

नमस्कार दोस्तो काफी समय से उत्तराखण्ड की वनस्पति पर कुछ नही लिखा आज लेकर आया हूं एक ऐसे पौष्टिक व औषधीय वनस्पति जो स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभदायक होने के साथ साथ स्वादिष्ट भी होती है।
हम इसके गुणों को जानते तो है किंतु फिर भी इसका व्यवसायिक या वैज्ञानिक उपयोग के नज़रिए से खेती नही करते जबकि एशिया के बहुत से देशों में इसकी खेती भी की जाती है।
दोस्तो इस लेख में बीच बीच मे एक नाम भी आएगा जो कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, उत्तराखण्ड में महानिदेशक के पद पर है और उनका नाम है डॉ. राजेन्द्र डोभाल
तो अब जानते है इस औषधीय वनस्पति के बारे में क्या है और इसमें क्या औषधीय गुण है।
दोस्तो मैं बात कर रहा हूं लिंगुड़ा के बारे में जिसका वैज्ञानिक नाम डिप्लाजियम एस्कुलेंटम(DiplaziumEsculentum) एथाईरिसी(Athyriaceae) फैमिली से सम्बन्ध रखता है। मेरा यह लेख डॉ. राजेन्द्र डोभाल जी के आर्टिकल पर आधारित है इसके सभी वैज्ञानिक गुणों की जानकारी उनके ही आर्टिकल से साभार प्राप्त है।
दोस्तो पहाड़ी सब्जियों का अपने मे एक अलग ही स्वाद होता है और इसका स्वाद तब और बढ़ जाता है जब इन्हें लोहे के बर्तन में बनाया जाता …

Kuchh ta soch कुछ त सोच

कुछ त सोच
हुन्दू कुई मेरु भी घर गौ मा जौमा मि जान्दू
जौ मा मि भी करदु घर आणु जाणु।
अब जाणु कैमा, कैमा लगाण आस
अब त लग्युं रैन्दू ख्याला म्यालो कु सास।अपणो मा बि चितांदु अफी थै बिराणु
निरसु सी लगदु यखा कु पीणु खाणु।
उजड़ीगे होली कुड़ी, पुंगड़ी पोड़ी बांज
बिसरीग्यु अपणी बोली भाषा, नि जाण्दू रीति रिवाज़।नि देखा कभी खिलदा ग्वीराल, फ्योंली, बुराँस
चाखि नि कभी हिसर काफ़ल, आरु, घिंगरु।
खायी नि कभी छंच्या, कपुलु, फाणु झुंगरु
देखी नि अल्लु कु हलोड़ु, लैयी नि ग्यों कु गेहोड़ु।जगाई नि कभी चुल्लो मा झौल
नि देखी कभी उर्खयलो कुटदा चौल।
नि पीसी जन्दुरो कोदू, पीसी नि कभी सिलटो लोण
देखी नि बरखा का तिबड़ाट मा काम की भौण।लगाई नि कभी हैल दंदलु, नि जाणी क्या हुन्दू जोल
देखि नि कन हूंद गोठ, गाड़ी नि कभी गोठ कु मोल।
मिली नि शुद्ध पाणी, देखी नि कभी बगदु रौल
देखि नि गौ कु जीवन, क्या जणण जीवन कु मोल।आज जु हमुल नि देखी, कनके देखली औलाद भोल
नि छोड़ तौ पाड़ो जरा त द्वार मोर खोल
पछ्यांण ढकैकी ऐग्यो, गौ मुलुको छोड़
गौ-गल्यो, बाटा-घाटों याद करी, पाड़ो का बारा म कुछ त सोच!!!
अनोप सिंह नेगी(खुदेड़)
9716959339