किसी को सावन की पहली बारिश प्यारी लगी
किसी को टपकते छत छुरी कटारी लगी
अज मेरा दिल भी जार-जार रोया
लोगों को मेरे आंसुओं की बारिष अधूरी लगी

आदमी