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Showing posts from November, 2017

कवि सम्मेलन

देवियों एवम सज्जनों,
आप सभी को सूचित करते हुए बहुत हर्ष हो रहा है कि "खुदेड़ डाँडी काँठी साहित्य एवं कला मंच द्वारा प्रथम  उत्तराखण्डी कवि सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें "खुदेड़ डाँडी काँठी साहित्य एवं कला मंच" की ओर से आप सभी कविता व साहित्य प्रेमियों का तहे दिल से स्वागत व अभिनन्दन है।
कृपया इस कार्यक्रम में पहुँचकर कार्यक्रम को सफल बनाने में अपना अमूल्य योगदान दे। -: कार्यक्रम स्थल व समय :-
दिनांक- 26 नवम्बर 2017 समय- दोपहर 2:00 बजे, से श्याम 5:00 बजे तक।स्थान- शौकीन वाटिका, पुराना पालम रोड़, ककरौला।
नजदीक विश्वकर्मा मंदिर
नजदीकी मेट्रो स्टेशन  द्वारका मोड़
नजदीकी बस स्टॉप सुलाहकुल मंदिर/N S I T
संपर्क सूत्र
अनोप सिंह नेगी"खुदेड़" 9716959339
शंकर ढोंडियाल   9891431840
रंजीत रावत  9899164402
कमल रावत  9654262297

सतरह साल कु जवान

मि सतरह साल कु जवान छौ,
पर यी ज्वनि मा चिमोड्यो ग्यो बुढ़े ग्यो,
कैल इनै झिंझोड़ी कैल उनै झिंझोड़ी,
स्वार्थी लोगु ल मिथे खूब करोड़ी।पाणी मेरी पीठि धर्यू पर तिसालु कयु छौ,
छैन्द नाज पाता कु भूखु मोरणु छौ,
छैन्दी औलाद कु बांज बणयु छौ,
खौन्दार गौ गल्यो अलजयू छौ।क्या नि छाई मीमा अपणु!
आज भिखारी सी बणयु छौ,
रोजगार दीणा की क्षमता रखण वलु,
आज बेरोजगार कयु छौ।कुई रोजगार, कुई पढै कुई स्वास्थ्य का नौ पर,
मि फर ठोकर मारी दूर चली जाणु च,
रोजगार से फुर्सत नि जौ शहरों मा,
पढै अर स्वास्थ्य कु कै थै ख्याल बि नि आणू च।नि पछ्याण मिथई......!
मेरी कुगता कैरी मेरा नौ की दावत उड़ाणा छौ,
मि उत्तराखण्ड छौ उत्तराखण्ड!
मि उत्तराखण्ड बोनु छौ!म्यारु जन्मबार मनान वला बण्या छौ,
सितगा ही जी छा त करदा मेरी सत समाल,
आज सुदी दिखावा जी नि करदा त,
आज किलै हूण छाया मेरा यी कुहाल।अनोप सिंह नेगी(खुदेड़)
9716959339

Neta Ji Dhanya Chhau नेता जी धन्य छौ

तुम त नेता जी धन्य छौ!
जख चुनौ हुणा वख गुर्रो जन रबदोळ्येणा छौ,
जनि चुनौ निपटेणा मिंढको जन हर्ची जाणा छौ,
चुनौ से पैली त खूब घुंडा मुंडा टेकणा छौ,
पर जितणा बाद खुटा भी भया ख्वणी सी धरणा छौ।तुम त नेता जी धन्य छौ!
मुद्दों का फ़ंचा जौ फर चुनौ जीती की आणा छौ,
जितणा बाद वू फ़ंछो थै कैका कोलण चुटाणा छौ,
जनता थै खूब आस का सुपिन्या खूब दिखाणा छौ,
पैथर दा चट चुंगनी देकी अदनिंदल्या कैर जाणा छौ।तुम त नेता जी धन्य छौ!
चुनौ से पैली कुकरा गुसै क्या कुकर थै बी सेवा लगाणा छौ,
चुनौ जीती की तुम कुकरा गुसै थै भी आँखा दिखाणा छौ,
चुनौ प्रचार त इन कना छौ जन म्याला उर्याणा छौ,
म्यालो की चुकापट देखा सब प्रचार फर लगाणा छौ।तुम त नेता जी धन्य छौ!
कबि ये दल कबि वे दल इतगा किलै रगर्याणा छौ,
इनि क्या अंतुरि आणि जु इनै-उनै मुंड कुच्याणा छौ,
एक दल का व्हैकि तुम रै नि सकणा छौ,
अर अफ थै कुल जन सेवक बथाणा छौ।तुम त नेता जी धन्य छौ!
जै कामा ज्ञान नि वेमा फुन्यानाथ व्है जाणा छौ,
तभी त जख जाणा वखि चुकापट कै जाणा छौ,
कबि जै देखी खार खैकि सिंग पल्याणा रौ,
आज वेकी घुग्या बैठी वेथै खूब पुल्याणा छौ।तुम त नेता जी धन्य छौ!
कुई फैल…

Meri doodha ki bhadeli मेरी दूधा की भदेली

मेरी दूधा की भदेलीहे मेरी दूधा की भदेली
खांद म बैठी क्या सोचणी व्हैली!
कु आलु चट यखम खै जालु परली।हे मेरी दूधा की भदेली
भैर क्या जी देखणी व्हैली!
घुण्डी घुस्ये कु ऐ होलु भितनै देली।हे मेरी दूधा की भदेली
चुल्लू भितर क्या हेरणी व्हैली!
कु जगाणु होलु आग की झैली।हे मेरी दूधा की भदेली
इन किलै मड़केणी व्हैली!
कु कनु होलु कंदुड़ पकड़ी करली।हे मेरी दूधा की भदेली
इन किलै जलकेणी व्हैली!
कैल मारी ढसाक भदेली फरकेलि।हे मेरी दूधा की भदेली
यी सुड़की कु मरणी व्हैली!
कख बटी ऐ व्हैली यख या बिरली।अनोप सिंह नेगी(खुदेड़)
9716959339

Prakriti Dohan प्रकृति दोहन

आखिर ये क्या हो रहा?
कही आगज़नी कही,
कही जलमग्न सब हो रहा,
सुख -सुविधाओं की तलाश में!
वजूद स्वयं अपना मानव खो रहा।आखिर कैसा सुख तू खोज रहा?
पैदल चलना तुझे दुःख नही दे रहा
न बरसात का मौसम तुझे भिगो रहा
मंथन करके देख स्वयं तू कष्टो को समेट रहा!आखिर क्यों देता दोष प्रकृति को?
सुख के लिए दोहन इसका तू कर रहा,
कही नदियों को विलुप्त कर रहा,
कही पहाड़ उजाड़ खोखला कर रहा!
जीवन स्वयं अपना नष्ट कर रहा।आखिर क्यों सज़ा न मिले तुझको?
जीवन निर्भर जिनपर तेरा,
है अस्तित्व जिनसे तेरा,
उनको ही तू चोटिल कर रहा!
हकदार स्वयं सज़ा तू बन रहा। वक़्त है अभी संभल जा!
जरूरतों को अपनी तू अंकुश लगा,
आवश्यकताएं न को इतनी बढ़ा,
बहुत हो चुका अब ठहर जा!
वरना सज़ा पाने अब तत्पर हो जा!!
अनोप सिंह नेगी(खुदेड़)
9716959339