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Showing posts from August, 2016

वु देख मेरु बालूपन

वु देख वख्मी खत्यु च मेरु बालूपन,
कदगा प्यारु कदगा न्यारू मेरु बालूपन,
सि देख खित-खित हैंसी द्वी दाँत कन छौ दिखाणु,
आँखि त देख मेरी जरा लोगु देखि मि कन रगर्याणू। जरा यख भी त देख मि ग्वाया छौ लगाणु,
कभी हथि कभी खुट्यु थै अग्ने छौ बढाणु,
मुण्ड त देख मेरु जरा द्वी धमेलि मेरी,
एक रिबन खुल्यु हैकू कन सुंदर फूल बण्यु। मेरी नकपोड़ि फर नज़र नि पोड़ी क्या तेरी?
सीप की धार कन हुटड़ियूं मा कन चुयेणि,
अरे रे रे !! मेरी किलक्वरि नि सुणि त्वेन?
दगड़यों दगड़ी कन किकलाट च मचाणु। अहा अब त मी थाह लेकि दिवलि पकड़ी दौड़ाणु,
यी क्या !! कैन पकड़ी होलु मीथै पिछनै बिटी खुचिलि,
ये ब्बाबा मेरी गलोड़ि लाल कैयेलि भुक्की दे दे की,
कभी माजी कभी फूफू बारी लगैकि हर कुई प्यार लुटाणु। वो देख मेरु बालूपन मीथै कन धै च लगाणु,
मेरु वू स्वाणु बालूपन मीथै कन मल्काणु,
जिकुड़ि मा हस भ्वरि कुतग्यलि सी लगाणु,
कभी मुल-मुल हैसाणु कभी सुगबुग रुवाणु। वू देख वख्मी खत्यु च मेरु बालूपन,
अब कख बिटि ल्याण खोजी वू बालूपन,
खरीदणो कु छौ मी तैयार जू कैमा मिली जौ,
मेरु वू बालूपन मेरु वू बालूपन मेरु वू बालूपन। अनोप सिंह नेगी(खुदेड़)
9716959339

पत्ती जन्माष्टमी का त्यौहार उत्तराखण्ड में

सभी साथियो को जन्माष्टमी की बहुत बहुत शुभकामनाये। दोस्तों इस त्यौहार को उत्तराखण्ड राज्य के अंतर्गत अल्मोड़ा जिले के कई क्षेत्रो में कुछ अलग तरीके से मनाया जाता है। जिसे वहा की भाषा में पत्ती कहते है। इसका आयोजन जन्माष्टमी से एक दिन बाद होता है जिसमे चीड़(सुला या कुलौ) के पेड़ को एकदम साफ छील दिया जाता है और इसे जितना हो सके फिसलने वाला बनाया जाता है। इसपर पेड़ की चोटी पर फल और दही हांडी को बांध दिया जाता ह, फिर इसे जमीन में अच्छी तरह से गाड़ दिया जाता है ताकि कोई अनहोनी न हो, इसके बाद शुरू होती है प्रतिस्पर्धा उस दही हांडी तक पहुचने की हर कोई कोशिश करने लगते है वहा तक पहुँचने की और इस दौरान पेड़ की फिसलन बनी रहे इसके लिए उसपर और उन लोगो पर समय समय पर पानी भी डाला जाता है साथ ही आस पास में दुकाने लगी होती है जहाँ लोग खरीदारी भी करते है। कही पर लोग गीत,झोड़ा आदि लगाते है और मेले में आये लोगो का मनोरंजन करतेे है।
सच में गाँव में लगने वाले मेले की एक अलग ही रौनक होती है पूरे दिन रोमांच बना रहता है। आज इसे मैं ठीक उसी प्रकार से लिख रहा हूँ जैसे मैंने सालो पहले नब्बे के दशक में देखा था लगभग 198…