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Showing posts from November, 2015

शराब हज़ारो की

ये कविता उन भाइयो को लिए जो शराब पी बर्बाद हो रहे है। काश उन्हें भी ये कविता पढ़ने का समय मिल पाता!!!!!!!!!!!!!!!!!!!पी जाते हो शराब हज़ारो की
बस थोड़ा सा ख्याल रखना उन लाचारों की
बोतल तोड़ फेंक न देना रहो में
चुभ जाते है टुकड़े किसी के पांव मेंटूटी बोतल देख भी कोई मायूस होता है
क्योंकि आठ आने की बोतल में भी उसका परिवार पलता है
जिन बोतलों को खाली कर तुम घर बर्बाद करते हो
कोई उन बोतलों के सहारे घर अपना आबाद कर रहा होता है जिस बोतल के लिए मंगलसूत्र पत्नी का तुमने बेच दिया
उसी बोतल को उठा किसी ने जीवन का शुरुआत किया
जिस बोतल के लिए तुमने परिवार अपना छोड़ दिया
उसी बोतल से किसी ने अपना परिवार जोड़ लियानशा तो दोनों को है इस बोतल का
बस फ़र्क़ इतना ही है
एक नशे में राह पकड़ रहा है
और एक राह से भटक रहा हैअनोप सिंह नेगी(खुदेड़)

चकबन्दी कु सैलाब

चला दगड़यों गांव मा मकान जो सूना छी ऊ थै अब घर हम बणौला खौंदार हुई वू कुड़्यो थै फिर से सजौला घर कु आँगन थै नौना बालो की किलक्वारी से गुंजौला चकबन्दी कु सैलाब अयु चा चला दगड़यों हम भी तौरी जौला। छोड़ी की ये मोल की हवा पाणी थै घर बौड़ी शुद्ध हवा पाणी कु आनन्द उठौला अंजान यु शहरो थै छोड़ी की गाँव गल्यो मा फिर से मेल जोल बढ़ोला चकबन्दी कु सैलाब अयु चा चला दगड़यों हम भी तौरी जौला। हैल दंदला का लाठो थै फिर से बणौला हरच्या वू निसुड़ो थै फिर से खुज्यौला आ हे पहाड़ का वंशज पहाड़ी चल एक बार फिर से वे पहाड़ थै बचौला चकबन्दी कु सैलाब अयु चा चला दगड़यों हम भी तौरी जौला। अनोप सिंह नेगी(खुदेड़)


तुझसे पहले

कहानी मेरी कुछ अज़ीब होगी
तुझसे शुरू है तुझपर ही ख़त्म होगी
चाहता हूँ मैं तुझे किस कदर
कैसे बताऊ तुझे ऐ मेरे हमसफ़र।गई गर तू मुझे छोड़कर तो देख लेना
तुझसे पहले रुख़स्तगी मेरी होगी
वहा भी राहो में फूल बिछाये मिलुंगा
तुझसे पहले वहा मौजूदगी मेरी होगी।तेरे बिन जीना पड़े मुझे ऐसा मैं होने न दुंगा
ख़ुद से पहले तुझे मैं जाने न दुंगा
तू सोच रही होगी जाने की
तुझसे पहले मैं ये दुनिया छोड़ दुंगा।राह जिस तू जायेगी खड़ा मैं मिलुंगा
तेरे क़दम रखने से पहले उस जगह को गुलशन कर दुंगा
तू दो कदम ही चली होगी
और मैं सफ़र ख़त्म कर चूका हूँगा।तू पहुचेगी जब वहां
आशियाना हमारा बन चूका होगा
तू पूछती है ये क्या पागलपन है
ये चाहत ही तो है मेरी जो मैं इतना कुछ कर गुजरूँगा।अनोप सिंह नेगी(खुदेड़)
9716959339