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Showing posts from May, 2013

उत्तराखण्ड राज्य एक दृष्टि में

उत्तराखण्ड राज्य एक दृष्टि में 
भौगोलिक स्थिति                                २८°४३' उत्तरी अक्षांश तथा ७७°३४' पूर्वी देशांतर से ८१°०२' तक। सीमावर्ती राज्य                                   हिमाचल प्रदेश, उत्तरप्रदेश तथा हरियाणा।  भौगोलिक क्षेत्रफल                               ५३,४८३ वर्ग किमी।  भौगोलिक सीमाए                                उत्तर में हिमालय पर तिब्बत(चीन), पूर्व में
                                                      नेपाल, दक्षिण में उत्तर प्रदेश, पश्चिम में हरियाणा                                                         व हिमाचलप्रदेश। लम्बाई                                              पूर्व से पश्चिम की ओर ३२८ किमी  चौड़ाई                                               उत्तर से दक्षिण की ओर ३२० किमी राज्य का आकर                                  लगभग आयताकार  शासकीय नाम                                     उत्तरखण्ड  नवगठन                                            ९ नवम्बर २०००  राजधानी                                           देहरादून(३०°२' उ.  व ७८°०२' …

Stinging nettle(कंडली)

Stinging Nettle(कंडली)


  दोस्तों पिछले अंक में हम लेकर आये थे bhimal(भ्युल) Grewia optiva
आज हम लेकर आये है उत्तराखंड का एक ऐसा पौधा जिसे छूते ही ऐसा महसूस होता है की बदन में करंट लग गया हो शारीर के जिस अंग पर ये लग जाये कुछ वक्त के लिए तो वो अंग सुन्न हो जाता है। जी हा आप बिलकुल सही समझे इसका नाम कंडली (Stinging nettle) ही है। यह एक ऐसा पौधा है, जिसे बहुत कम लोग जानते है लेकिन जो इसे जानते है उन्हें पता होगा की इसका दर्द कैसा होता है। तो आइये जाने इसके बारे में ये क्या है और किस काम आता है। 
     यह जरूरी नही कि ये नुकसान ही करता है इसके बहुत फायेदे भी है। इस पौधे मेंvitamins A, C, iron, potassium, manganese, and calcium. जैसे गुण भी विद्यमान है। हमारे देश में तो इसकी खेती नहीं की जाती लेकिन बहुत से ऐसे देश है जहा इसकी खेती की जाती है और इसको सब्जी व चटनी के रूप में इस्तेमाल में लाया जाता है।  उत्तराखंड, हिमाचल जैसे पहाड़ी क्षेत्रो में भी इसका प्रयोग सब्जी के रूप में किया जाता है। इसे पनीर के साथ भी बनाया जाता है। कुछ लोग इसका सूप भी बनाकर पीते है। यह पौधा एक औषधीय पौधा भी है। जर्मनी म…

bhimal(भ्युल) Grewia optiva

   पिछले अंक में हमने बात की थी  कुंड़जू Artemisia(नागदाना)
की जिसमे हमने आपको बताया था की इस पौधे का क्या इस्तेमाल है तथा किस-किस कम में यह पौधा प्रयोग में लाया जाता है। आज हम जानकारी लेकर आये ऐसे ही एक उत्तराखंडी वृक्ष की, यह वृक्ष बेहद अनमोल वृक्ष है। तो आइये जाने इसके बारे में।      उत्तराखंड में औषधीय वृक्षों की कोई कमी नहीं है, औषधीय वृक्षों में एक नाम है भीमल, जो की काफी बड़ी मात्रा में पहाड़ों पर खेतों के किनारे पाए जाते है, इसे हम भीकू, भीमू, और भियुल नाम से भी जानते है, इस वृक्ष का कोई ऐसा भाग नहीं है जो कम नहीं आता हो, इसके बीज को खाया जाता है फल के तौर पर जब यह पाक जाता है तो ये बहुत स्वादिष्ट होता है, भीमल के पत्ते मवेशी चाव से खाते है जिससे कम दूध देने वाले मवेशी दुधारू हो जाते है, भीमल की डंडियाँ — डंडियों से पत्ते जानवरों को डालने के बाद डंडियों को बांधकर गाड़ (नदी) के पानी में रखकर पत्थरों से करीब ३-४ महीनो के लिए दबाकर रख देते है, इन डंडियों से जब पानी निकला जाता है तो इसकी चाल से सलू (सण) बन जाता है, जिनसे रस्सियाँ, दौंला (जानवरों को बाँधने वाला) इत्यादि बनते है, अंदर…