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Showing posts from November, 2016

प्रवासी

प्रवासी बोलुण कतगा आसान च,
कभी प्रवासी जीवन जी की त देख,
दस बाई दस का कमरा म रै सै की त देख,
प्रवासी जन घर बौण करी की त देख,
बिसरी जैली प्रवासी बोलुणा कु ढब,
जरा पीड़ा वैकि समझी की त देख।

उत्तराखण्ड स्थापना दिवस

उत्तराखण्ड स्थापित त व्हैगे,
जड़ नि मिली अब तक।
सोलह साल म आठ मुख्यमन्त्री व्हैगी,
राजधानी सुनिश्चित व्है नि अब तक,पुंगड़ी बंजे गी पहाड़ो मा,
पर चकबन्दी व्है नि अब तक।
पलायन बढ़दी जाणू पहाड़ मा,
रोज़गार व्यवस्था दिखे नि अब तक।कनकै दे द्यु सोलहवी वर्षगांठ की बधै,
उत्तराखण्ड उत्तराखण्डियुँ कु व्है नि अब तक।
जौका प्रताप उत्तराखण्ड मिली हम थै,
ऊथै न्याय मिली नि अब तक।एकजुट एकमुट व्हैजा मेरा दगड्यों,
बीस नवम्बर हक़ लेण आवा रामलीला मैदान तक।
धै लगाणु अपणु समाज हम तुम थै,
एकजुट एकमुट व्है जौला जन्म-जन्मों तक।

अनोप सिंह नेगी(खुदेड़)
9716959339

ऐ कायर पाकिस्तान

जी तो करता है ऐ कायर पाकिस्तान,
आज तेरा इतिहास लिख दू।
रज में मिला दू तुझे कही ऐसा न हो,
खगोल भूगोल तेरा मैं बदल दू।बस अपनी खुशकिस्मती समझ तू,
कि मैं भारत जैसे शांतिप्रिय देश से हूँ।
नही तो सच कहता हूँ मेरा बस चले,
तो मैं तेरा इस धरती से नामो निशां मिटा दू।तेरी इस कायराना हरक़त का तुझसे,
गिन गिन मैं बदला लू।
मेरे जवान तो शहीद हुए है,
तुझे मैं नर्क में भी जगह न मिलने दू।हर बार न पृथ्वीराज तुझको मिलेगा,
जो तुझे हर बार माफ़ करेगा।
सच कहता हूँ मुझे मौका मिला तो,
तुझे कीड़े मकोड़ो के जैसे मसल दू।मेरे सब्र की हद तो अब पार हो गयी,
न मुझे और उकसा कही तेरा सर न कुचल दू।
अपने इतिहास में झाक ले एक बार,
कही तेरा इस बार उससे से भी बुरा हस्र न कर दू।जय हिन्द जय भारत अनोप सिंह नेगी(खुदेड़)

म्यार अपुंण बचपन

दीदों ये माटु मा खत्युं
म्यार अपुंण बचपन
पाटी बुखल्या लेकी
जब जांद छ्या हथपन
मतीसारी बिटी सरा
गांव दिख्यांणा म्यारु
आंखी भरे गेन देखी
ब्वांग अपुंण प्यारु
जब भी जांदु गांव दीदों
खुजदु अपुंण बचपन
कबी कंली मुड कबी
दीदों कंली मथपन
हपार दिख्यांणा छन
सरा बाट म्यार गांव क
पीपला खोली बाटु दिख्यांणा
  डिग्गी जुगंल्या पाणी क
  ख्यात बी दिख्यांणु च
  आली बी दिख्यांणु च
  ढुकांणी अर छ्वाया बीटी
   गांव सरा दिख्यांणु च
बगत क हिसाब किताब भी
अजब गजब छ्यायी
बिंडु क घाम देखी की
सुबेर चितांद छ्यायी
बुये बुल्दी छै धै लगे की
गौर बंधण क टैम ह्वै ग्यायी
खाल अछल्या ककडी अछल्या
घाम रीयाड म पौंछी ग्यायी
दीदों ये माटु मा खत्युं
म्यारु अपणु बचपन
पाटी बुखल्या लेकी जब
गे छ्या मी.......
सर्वाधिकार सुरक्षित @सुदेश भट्ट(दगडया)