Skip to main content

Posts

Showing posts from June, 2014

गम को साथी बना लिया

गम को साथी बना लिया

तोड़कर दिल हमारा भला तूने क्या पा लिया तूने कुछ पाया हो-न-हो हमने तो गम पा लिया अब तो इस गम को हमने अपना साथी बना लिया ऐ बेवफ़ा तुझको हम पहचान न सके तूने अब तो हमसे मुह मोड़ लिया हमसे नाता तोड़कर गैरों से रिश्ता जोड़ लिया तोड़कर दिल हमारा भला तूने क्या पा लिया तूने कुछ पाया हो-न-हो हमने तो गम पा लिया


अनोप सिंह नेगी(खुदेड़)

दर्द तो अब

दर्द तो अब

ऐ दोस्त ये दर्द तो अब ज़िन्दगी का इक हिस्सा है इस ज़माने में इसके बिना न कोई किस्सा है      गम को सीने से लगा लो यारो      फिर ये कहना ज़माने से खुशनशीब न कोई हमसा है दगा तो देती है खुशियाँ जिसका पलभर का भरोसा नहीं दर्द न होगा कभी कम इसने तो वफ़ा का दमन थामा है       जिसने समझा है इसे, परेशां वो हो नहीं सकता
  पना हमदम बना लो इसे, फिर जहाँ में न कोई तुमसा है
अनोप सिंह नेगी (खुदेड़)