Skip to main content

Fingr Millet Raagi mandua मंडुआ

मंडुआ/ रागी Fingr millet

नमस्कार दोस्तों मेरे पास वनस्पतियों पर काफी लेख है किन्तु कुछ मित्रो के आग्रह परआज मैं बात करने वाला हूँ एक बहुत ही फायदे वाले ओषधीय गुणों से भरपूर अनाज कि। इसे मधुमेह के इलाज़ के लिए रामबाण माना जाता है और इसकी पुष्टि विज्ञान भी कर चुका है। मधुमेह(शुगर) के रोग से ग्रस्त लोगो के लिए आज के समय में इसके आटे से निर्मित बिस्कुट भी मार्किट में उपलब्ध है। तो चलिए दोस्तों अब बात करते है इस अनाज के बारे में। 
दोस्तों आज बात कर रहा हूँ मैं मंडुआ/रागी की। यूं तो मंडुआ विलुप्त होने लगा है लेकिन बीमारियो के इलाज़ के लिए इसकी मार्किट में मांग बढ़ने के कारण एक बार फिर से अस्तित्व में आने लगा है। इसकी मांग न सिर्फ भारत में बल्कि भारत से बाहर भी काफी मात्रा में है। मंडुआ आज की फसल नहीं है यह तो आज से लगभग 3000 ईसा पूर्व की फसल है। इसे हम सिर्फ अनाज के रूप में ही नहीं बल्कि औषधि के रूप में भी जानते है, और जो नहीं जानते है अब इसे पढ़ने के बाद वो भी जान जायेंगे। यदि इस अनाज को रोजगार से जोड़कर देखा जाये तो काफी बेहतर परिणाम देखने को मिलेंगे। आगे आप आगे पढ़ेंगे इसके महत्व इसे पोषक तत्व और इसका व्यपारिक स्तर, चलिए जानते है इसके बारे में। 
यूँ तो मंडुआ को बहुत से नामो से जाना जाता है किन्तु भारत में इसे रागी के नाम से अधिक जाना जाता है। आइये जानते है इसे देश दुनिया में किस किस नाम से जाना जाता है।
अंग्रेजी में इसे finger Millet हिंदी में मंडुआ या चून, उत्तराखण्ड में कोदाक्वाद और अन्य स्थानों में मारवामांडियानागलीमंडल नाचनी आदि नामो से जाना जाता है। 
भारत में मंडुए की मुखयतः दो प्रजातियां ElusineI Indica व Eleusine Coracana पायी जाती है। ये समुद्र तल से लगभग 2300 मीटर की ऊंचाई पर उगाई जाती है।
मंडुआ एक ऐसा अनाज है जो दिन और रात प्रकाश संश्लेषण कर लेता है। किसी भी जलवायु और मिट्टी में आसानी से हो जाता है। यही कारण है कि ये देशभर में लगभग सभी जगह हो जाता है। मंडुआ की जड़े काफी गहरी होने के कारण यह सूखा भी सहन कर लेता है, इसी कारण ये किसी भी विषम परिस्थिति में उत्पादन दे देता है। 
मंडुए में 5 लेयर पायी जाती इसी कारण ये और millet से Dietary Fiber की तुलना में सबसे बेहतर है। FOA के अध्ययन अनुसार मंडुआ में Starch Granules का बड़ा होता है,जिस कारण यह Enzymatic Digestion के लिए बेहतर पाया गया है।
यूं तो मंडुआ कि उत्पति इथुपिय हॉलैंड से माना जाता है, किन्तु विश्व में सबसे अधिक मंडुआ भारत में ही उत्पादन होता है। विश्वभर का 40% मंडुआ भारत में उत्पादन किया जाता है। विश्व में मंडुआ अफ्रीका से जापान और ऑस्ट्रेलिया तक उत्पादन किया जाता है। विश्व के 2.5 मिलियन टन उत्पादन में अकेले भारत का योगदान लगभग 2.15 मिलियन टन मंडुए का होता है।

अब बात करते है इसके पोषक तत्वों की:- 
प्रोटीन  7.3 ग्राम, फाइबर। 3.6 ग्राम, आयोडीन  104 मिलीग्राम, कार्बोहाइड्रेट  72 ग्राम, फैट  103 ग्राम,  कैरोटिन  42 माइक्रो ग्राम पाये जाते है। मिनरल्स में कैल्शियम  344 mg और फॉस्फोरस 283 mg प्रति 100 ग्राम पाया जाता है। इस में Ca की मात्रा चावल और मक्की से काफी अधिक होती है, इनसे लगभग 40 गुना अधिक और गेहूँ से 10 गुना अधिक। इसका उपयोग पाचन शक्ति को बढ़ाता है, हड्डियों को मजबूत करता है, वजन को सामान्य बनाये रखने के लिए भी इसे उपयोगी माना गया है। एंटी एजिंग में भी इसे उपयोग में लाया जाता है। मंडुआ का नियमित उपयोग रक्त में शुगर की मात्रा को बढ़ने नही देता है। मंडुए के आटे से सरसो के तेल के साथ मिलाकर बच्चों की मालिश भी की जाती है। ऐसा करने से एक तो बच्चे के शारीर से रोयेदार बाल हट जाते है और दूसरा हड्डियों को मजबूती मिलती है। डायबिटीज़ के लिये भी यह बहुत उपयोगी माना जाता है। इसमें बहुत अच्छी मात्रा में न्यूट्रेटिव गुण उपलब्ध होते है। विश्व के बहुत से देशो में इसकी बहुत अधिक मांग है,  इनमे मुखयतः कनाड़ा, नार्वे, यूएस, ओमान, कुवैत, ऑस्ट्रेलिया, जापान आदि है। 
आपको बता दे कि मंडुए के बिस्कुट बनाने की विधि को 2004 में पेटेंट किया गया था और 2011 में इससे रेडीमेड फ़ूड प्रोडक्ट बनाने के लिए पेटेंट तैयार किया गया था। न्यूट्रेटिव डाइट प्रोडक्ट्स के लिए मंडुए का काफी प्रयोग होता है। मार्किट में आपको मंडुए से तैयार ब्रेड, बिस्कुट, पास्ता, बर्फी, नूडल्स आदि उपलब्ध हो जायेंगे। घरेलु उपयोग में इसे रोटी बनाने के उपयोग में लिया जाता है, इसका हलुआ भी बनाया जाता है बाड़ी(एक तरह का उत्तराखण्डी भोजन) भी बनाया जाता है। जापान में उत्तराखण्ड को अच्छी मात्रा में मंडुआ उपलब्ध करवाया जाता है। मंडुआ मार्किट में 50 से 60 रूपए प्रति किलो उपलब्ध है वही अधिक मात्रा में यह 30 से 40 रूपये किलो तक उपलब्ध होता है। भले ही मंडुआ भारत में सबसे सस्ता है लेकिन इसके न्यूट्रिशनल गुणों के महत्व से जागरूक देश अमेरिका में यह सबसे महंगा अनाज है। यह भारत से कई गुना अधिक कीमत पर अमेरिका में मिलता है अमेरिका में यही मंडुआ लगभग 600 से 700 रूपये किलो बिकता है। जैविक मंडुए का आटा भारत के बाज़ारो में 150 रूपये प्रति किलो उपलब्ध होता है। 

कुछ पुराने वानस्पतिक लेख 

भीमल                      बुराँश शर्बत             कंडली
कुणजु/ नागदाना        लिंगुड़ा                   हिंसर
किलमोड़ा                  घिंगरु                    भमोरा                डैकण/डकैन              तिमला                   मालू                टिमरू

अनोप सिंह नेगी(खुदेड़)
9716959339

Comments

Popular posts from this blog

Kangni kauni कंगनी कौणी

कंगनी, काकनी, कौणी Foxtail मिलेटएक ऐसी फसल जो लगभग धरती से समाप्त हो चुकी है यदि इसके प्रति हम लोगो मे जागरूकता होती, तो शायद आज इसकी ऐसी हालत देखने को नही मिलती। यू तो हम पेट भरने के लिए स्वाद के लिए मार्किट में उपलब्ध कई खाद्य पदार्थो को खाते है। यदि मार्किट में कुछ नया आता है तो उसे एक बार जरूर ट्राय करते है। लेकिन ऐसी पौष्टिक खानपान की वस्तुओं को अक्सर शक की नजरों से देखते है कि पता नही इसके कोई साइड इफ़ेक्ट न हो कुछ गलत न हो जाये। लेकिन यदि यही चीज़ यदि मार्किट में इसकी साधारण अवस्था के बदले किसी आकर्षक पैकेट में बंद मील उसपर एक्सपायरी लिखी हो चाहे वो दुबारा रिपैक ही क्यों न कि गयी हो, उसके पौष्टिक गुणों को निकालकर क्यो न हमारे आगे परोसा जाए हम बहुत जल्द उसपर भरोसा कर लेते है। इसका उदाहरण होर्लिक्स जैसे चीजे है, जिसमे मूंगफली से उसके सारे पौष्टिक गुण निकालकर उसकी खली हमारे बीच खूब परोसी जाती है। यदि मूंगफली सीधे खाने को बोला जाए और कोई सड़क किनारे बेच रहा हो तो हम उसे शक भरी निगाहों से देखते है कि पता नही ठीक है या नही है, ऐसे बहुत से विचार मन मे उठते है। चलिए अब बात करते है आज की ऐ…

Timru Timur Zanthoxylum Alatum टिमरू

टिमरू/ टिमुर Zanthoxylum Alatumनमस्कार दोस्तो सबसे पहले कल के लेख में हुई गलती के लिए क्षमा चाहता हूँ उस लेख में मैंने मालू के अंग्रेजी नाम को ZanthoxylumAlatumलिखा था। और दूसरा उसकी कीमत मैने जो बताई थी वो कीमत टिमरू के फल की है। क्योकि कल मैं एक लेख खत्म कर चुका था और दूसरा लिख रहा था गलती से मैंने इसे वहां लिख दिया यहाँ लिखने की बजाय।
आशा करता हूं आप मेरी इस गलती को माफ करेंगे। अब आज टिमरू की ही बात मैं इस लेख में कर रहा हूं, आइए जानते है टिमरू के क्या उपयोग है और ये कहा कहा पाया जाता है। टिमरू बहुत कम लोग इसे जानते होंगे किन्तु जो पहाड़ो से संबंध रखते है वो इसके बारे में जरूर जानते होंगे। यह एक झाड़ीदार कांटेदार पौधा है जिसका अध्यात्म और अषधियो में उपयोग होता है। जो नही जानते तो वो भी इसे जान लेंगे यदि आपने गांव में कोई शादी अटेंड की होगी तो अब जान जाएंगे। दूल्हे को हल्दी लगाने, नहाने और आरती उतारने के बाद उसे पीले कपड़ो में भिक्षा मांगने को भेजा जाता है, एक झोली और एक लकड़ी का डंडा उसके पास होता है ये वही लकड़ी का डंडा होता है जिसके बारे में अभी हम जानेंगे। इसका उपयोग इतने तक ही सीमि…