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Timru Timur Zanthoxylum Alatum टिमरू

टिमरू/ टिमुर Zanthoxylum Alatum

नमस्कार दोस्तो सबसे पहले कल के लेख में हुई गलती के लिए क्षमा चाहता हूँ उस लेख में मैंने मालू के अंग्रेजी नाम को Zanthoxylum Alatum लिखा था। और दूसरा उसकी कीमत मैने जो बताई थी वो कीमत टिमरू के फल की है। क्योकि कल मैं एक लेख खत्म कर चुका था और दूसरा लिख रहा था गलती से मैंने इसे वहां लिख दिया यहाँ लिखने की बजाय।
आशा करता हूं आप मेरी इस गलती को माफ करेंगे। अब आज टिमरू की ही बात मैं इस लेख में कर रहा हूं, आइए जानते है टिमरू के क्या उपयोग है और ये कहा कहा पाया जाता है।

टिमरू बहुत कम लोग इसे जानते होंगे किन्तु जो पहाड़ो से संबंध रखते है वो इसके बारे में जरूर जानते होंगे। यह एक झाड़ीदार कांटेदार पौधा है जिसका अध्यात्म और अषधियो में उपयोग होता है। जो नही जानते तो वो भी इसे जान लेंगे यदि आपने गांव में कोई शादी अटेंड की होगी तो अब जान जाएंगे। दूल्हे को हल्दी लगाने, नहाने और आरती उतारने के बाद उसे पीले कपड़ो में भिक्षा मांगने को भेजा जाता है, एक झोली और एक लकड़ी का डंडा उसके पास होता है ये वही लकड़ी का डंडा होता है जिसके बारे में अभी हम जानेंगे। इसका उपयोग इतने तक ही सीमित नही होता है बल्कि यह और भी बहुत से कार्यो में काम आता है बद्रीनाथ, केदारनाथ मंदिर में यदि आप गए हो तो याद कीजिये वहां भी प्रसाद के रूप में यह टिमरू(इसकी टहनी) चढ़ाया जाता है। यू तो टिमरू की बहुत सी प्रजातीय विश्व मे उपलब्ध है जिनमे से पांच प्रजातीया उत्तराखण्ड में पायी जाती है।
टिमरू को अंग्रेजी में Zanthoxylum Alatum, हिंदी में तेज़फल, संस्कृत में तेजोवती के नाम से जाना जाता है। इसकी लम्बाई 10 से 12 मीटर तक हो सकती है।
अब बात करते है टिमरू के औषधीय गुणों की दोस्तो दांतो के लिए इससे बेहतर दातुन और कोई हो नही सकता, इसकी कोमल टहनी से आप दातून कर सकते है, पत्तो से दंत मंजन तैयार कर सकते है। यहां तक कि आप इससे दंत लोशन भी बना सकते है। इससे दातुन करने से आपके दांत मजबूत और चमकदार होते है। इसके नियमित उपयोग से आपके दांतों में कीड़ा नही लगता। मसूड़ो पायरिया जैसी बीमारी नही होती। बुखार के उपचार में भी टिमरू का उपयोग किया जाता है। इसके फल की यदि बात करे तो यह भी गुणकारी होता है, यह फल पेट के कीड़े मारने के लिए उपयोग में लाया जाता है। इसे हेयर लोशन के रूप में भी उपयोग किया जाता है। इसे आप एक प्रिजर्वेटिव के रूप में भी उपयोग कर सकते है। इसके पत्तो को यदि हम भंडारित किये जाने वाले अनाज में डाल दे तो यह उसमे कीट नही लगने देता। बाजार में बहुत से उत्पाद उपलब्ध है सभी मे प्रिजर्वेटिव्स का उपयोग होता है, और हम इन्हें सुरक्षित समझ लेते है किंतु इन प्राकृतिक वनस्पतियो के हम असुरक्षित समझते है जबकि ये स्वयं एक प्रिजर्वेटिव्स है अन्य चीजो की उम्र बढ़ाने में काम आते है। प्रिजर्वेटिव किसी भी वस्तु की सेल्फ लाइफ को बढ़ाने के काम मे आता है। और वही कार्य यह वनस्पति कर रही है जो प्राकृतिक रूप में हमे मिली हुई है।
इसके फल का उपयोग हींग के रूप में भी किया जाता है।
अस्थमा, फेफड़ो की सूजन, हैजा, बुखार, रक्तचाप, अपच की समस्या, गठियां, त्वचा रोग, दांत दर्द, ट्यूमर, खांसी, अल्सर, नशों की सूजन, पांव में ऐंठन आदि बहुत सी बीमारियों में इसका उपयोग किया जाता है। टिमरू के फल का उपयोग मसालों के रूप में भी किया जाता है। इससे बने चूर्ण मार्किट में उपलब्ध है।
Tejowatyadya Grita, Tumbawardi churn आदि आपको मार्किट में मिल जाएंगे।
टिमरू भारत, नेपाल, भूटान व उत्तरी अमेरिका व अन्य देशों में पाया जाता है। इंडियामार्ट पर इसके फल 120 रुपये से 400 रुपये प्रति किलोग्राम बिक रहे है। 
आशा है आपको यह जानकारी पसंद आयी होगी। यदि कोई कमी हो तो मार्गदर्शन जरूर कीजियेगा। इस जानकारी को अपने साथियों के साथ अवश्य सांझा करे।
और एक जरुरी बात 08 मार्च 2018 से 12 मार्च 2018 तक हमारा खुदेड़ डाँडी काँठी का स्टॉल द्वारका सेक्टर 13, नजदीक रेडिसन होटल, में होने वाले फ़नकार दी आर्ट में सुबह 10 बजे से रात 10 बजे तक लग रहा है। यहां पर आपको उत्तराखण्डी दाले, रेड राइस, झंगोरा, मंडुए(रागी) का आटा सिलबट्टे का पिसा नमक, बाल मिठाई, तिमला, लहसुन अचार, माल्टा, बुराँस जूस और टिमरू के बीज।
यह सभी वस्तुएं स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होते है।

कुछ पुराने लिंक:-

भीमल                      बुराँश शर्बत             कंडली
कुणजु/ नागदाना        लिंगुड़ा                   हिंसर
किलमोड़ा                  घिंगरु                    भमोरा                       डैकण/डकैन              तिमला                      मालू

अनोप सिंह नेगी(खुदेड़)
9716959339

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