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Showing posts from July, 2013

meri betuli meri laadi lathyali

गीत:   मेरी बेटुली मेरी लाडी लाठ्याली गायक: नरेंदर सिंह नेगी 
पिता - मेरी बेटुली मेरी लाडी लाठ्याली मेरी चखुली मेरी फूलू की डाली
          मेरी बेटुली मेरी लाडी लाठ्याली मेरी चखुली मेरी फूलू की डाली
          आज स्या देखदा देखदा बिराणी ह्वेगे सैंती पाली           आज स्या देखदा देखदा बिराणी ह्वेगे सैंती पाली
बेटी -  बाबा जी यकुली यकुली कन्कोवेकी जौलू           हे माजी बिरणा मुलुक कन्क्वेकी रौलू 
पिता - अफु भी रोय मैतियु भी रुलैगे आज छ्क्वेकी            हैसुदू  खेलुदू घौर सुन कैगे जिकुड़ीयु  दुखैकी            खुद लगली भै भैणियो की मैतियु की रोय ना             उपरी मुलुक उपरी मनख्यु  मा धीरज ख्वे न            खूब फल फूली मैतियु न भूली मेरी आंख्यु की उजयाली            बिराणी ह्वेगे सैंती पाली-बिराणी ह्वेगे सैंती पाली बेटी -   बाबा जी हे माजी
पिता - अपड़ू ह्वेकि भी अपुड़ु अपुड़़ू नि यो झन कनु धन चा           याद औंदन तेरा खेल खिलौणा दिन बाला पन का            किल्क्वारी मारी ग्वाया लगाणू याद आणू चा            तुत्लैकी तेरु बोलुणु बच्याणु याद आणू चा            नवाई तपाई ग्व्ल्याई हिटाई जिकु…

Natural Photos

कुछ मनमोहक दृश्य






Rajula Malushahi राजुला मालुशाही

राजुला  मालुशाही 

         यह एक सच्ची प्रेम कथा है, बात काफी सदियों पुरानी है जब कत्यूर वंश का लगभग आखिरी दौर था, इस कथा में बहुत ही विचित्र घटनाये भी हुई। आज भी राजा मालसाई को कुमाऊ में देवता के समान पूजा जाता है। राजुला जो भोट(भूटान) की थी जिसके लिए राजा मालसाई वहा तक पहुच जाता है, और भोटियो को हरा भी देते है किन्तु आखिर में धोखे से मार दिए जाते है। राजुला एक व्यापारी की लड़की थी और मालसाई एक राजा। तो दोस्तों आइये जाने इस पूरे घटना क्रम को कैसे यह एक अमर प्रेम कथा बनी, दोस्तों हो सकता है की इसमें को कमी भी रह गयी हो या कुछ गलतिया हुई हो उसके लिए मई आपसे माफ़ी चाहूँगा। यदि आप लोगो को इस बारे में कुछ और जानकारी हो तो कृपया अपने comments या e-mails के माध्यम से मुझे अवगत कराए हमारा e-mails पता है khudeddandikanthi@gmail.comfacebook इसकी शुरुआत कुछ इस प्रकार हुई, जैसा की कुम्भ के मेले से आप सभी लोग अच्छी तरह वाकिफ है, और यह मेला सालो से चला आ रहा है। तो यहाँ लोग कुम्भ में नहाने लोग ददोर दूर से आते है। उस वक़्त सुनपत सौक भी यहाँ अपनी धर्मपत्नी गांउली के साथ आया हुआ था। जो भूटान का था। जिन्…

rain at Preet Vihar, Delhi

khudeddandikanthi(खुदेड़ डाँडी काँठी)

Raja Malsaai

दोस्तों आपने बहुत सी प्रेम कथाये सुनी होंगी जैसे हीर-राँझा, लैला-मजनू आदि। यह कहानी भी इन्ही की तरह अमर कहानी है।  इस कहानी का नाम है राजा मलसाई । यह एक विचित्र प्रेम कथा है जिसमे की प्रेमी व प्रेमिका कभी मिले भी नहीं लेकिन वो दोनों एक दुसरे के स्वप्न में अत
आये और फिर हुई उनकी प्रेम कथा। जिसे अपने शब्दों में ढालकर श्री बगगिरी गोस्वामी जी ने ठा० आनंद सिंह हरी सिंह एंड सन्स के साथ मिलकर जनता के सामने प्रकाशित किया।
और आज यहाँ पर मै उन्ही की पुस्तक "राजा मलसाई विनोद" ग्यारहवे संस्करण से पर्स्तुत कर रहा हू, यदि कोई भूल या त्रुटी हो तो क्षमा प्रार्थी हू।



राजा मलसाई विनोद  पञ्च नामा देवा तुम, है जया दयाल।      गरीब पुकार पर, करी दिया ख्याल।। विष्णु भगवाना मेरी, सुणिया पुकार।  हाथ जोड़ी अर्ज करनू तुमरा दरबार।। ब्रह्मा जी महेश गौरा, मेरी नमस्कार। शीश नवै हाथ जोड़ी, करनू पुकार।। गणेश जी विनती कनू, हाथ जोड़ी बेरा। विघ्न दूर करी दिया, तुमरी मेहरा।। हिरदया सुमरण, सरस्वती माई। तमाम विघ्नू कणी, तुम दिया टाई।। तुमरा भरस परा, कलमा उठानू। राजा मालसाई को मै, बर्णन कनू।।
जो कुछ गलती हली, माफ़ करी दिया। मूर…