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कुंड़जू Artemisia(नागदाना)




     कुंड़जू जिसे छमारा भी कहते है। यह पौधा artemisia(नागदाना) के नाम से भी जाना जाता है। ये एक प्रकार का पौधा है जो उत्तराखंड में काफी मात्रा में पाया जाता है। यह पौधा बहुत ही शुद्ध माना जाता है, इसीलिए उत्तराखंड में इस पौधे का उपयोग पूजा में किया जाता है। इस पौधे की खेती नहीं की जाती किन्तु फिर भी यह पौधा स्वयं ही पैदा हो जाता है। इस पौधे का इस्तेमाल देखा जाये तो गाँवो  में लोग औषधि के रूप में भी करते है। जैसे की यदि बदन में खुजली हो जाती है तो, गौमूत्र में इसे मिलाकर बदन पर लगाया जाय तो खुजली ख़त्म हो जाती है।
 कुंड़जू 
     कुछ लोगो को तो मैंने इसका प्रयोग इत्र(PERFUME) की तरह करते हुए देखा है। कई लोग तो इसका प्रयोग रोजाना स्नान के लिए भी करते है।   कुंड़जू एक औषधीय पौधा भी है इसके पत्ते हाथो पर मलकर सूंघने से माउंटेन सिकनेस में लाभ होता है। इसकी खुशबू बहुत ही महक़ होती है। जब भी घर में कोई पूजा-पाठ होता है तो इसका इस्तेमाल भी अवश्य होता है देवी-देवताओ(GOD) को भी इसी से धूप देते है। जलते हुए कोयलो(COAL) के ऊपर इन पत्तो को देशी घी में भिगोकर फिर रखा जाता है, फिर देवी-देवताओ को तथा पितरो  को इससे ही धूप देते है। कहते है की इससे देवी-देवता प्रसन्न हो जाते है। इसकी खुशबू से वातावरण स्वच्छ हो जाता है।
File:Artemisia annua West Virginia.jpg
खेत कुंड़जू 
     दोस्तों ग्रीक, रसिया, अफ्रीका आदि कई देशो में तो इसकी खेती भी की जाती है, तथा इसका उपयोग मसालों में किया जाता है।
     अगले अंक में हम लेकर आयेंगे उत्तरखंड के एक वृक्ष की जिसे भीमल (भ्युल)  (Grewia optiva) के नाम से जाना जाता है।

     इस पौधे के बारे में मुझे इतनी  जानकारी है यदि किसी को और अधिक जानकारी हो या मेरी कोई जानकारी गलत हो तो कृपया COMMENT के माध्यम से या E-MAIL के माध्यम से अवश्य सूचित करे।धन्यवाद।
अनोप सिंह नेगी(खुदेड़)
File:Artemisia pontica0.jpg
ई-पत्ता -khudeddandikanthi@gmail.com

File:Wormwood bush.jpg



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